सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल ने बताया कि मुरादाबाद जनपद के छजलैट थानाक्षेत्र के मदी गांव के रहने वाले शीशपाल सिंह के इकलौते बेटे प्रिंस और उनके रिश्तेदार नवनीत की हत्या 11 नवंबर 2012 को हुई थी। इसके अगले दिन दोनों के शव गंगा से बरामद हुए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका था, इसलिए डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित किया था। कुछ दिन बाद एफएसएल रिपोर्ट आई, जिसमें शराब में जहर देकर हत्या की पुष्टि हुई थी। प्रिंस और नवनीत की हत्या हुई है, इसकी जानकारी होने के बाद भी तत्कालीन थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई नहीं।
जबकि पुलिस ने दोनों की गुमशुदगी दर्ज कर रखी थी। पीड़ित परिवार आरोपियों पर कार्रवाई के लिए दर-दर की ठोकरें खाता रहा। इसके बाद मृतक प्रिंस के पिता शीशपाल सिंह ने आठ जुलाई 2013 को कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर 23 अगस्त 2013 को सभी छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। आरोपियों को सजा दिलाने के लिए एफएसएल रिपोर्ट ही काफी थी, जिसमें यह स्पष्ट था कि प्रिंस और नवनीत को शराब में जहर देकर मारा गया है।
इस मुकदमे की विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष उपेंद्र कुमार और राजीव कुमार तरार ने की। एफएसएल रिपोर्ट के मजबूत साक्ष्य के साथ विवेचक ने रजबपुर क्षेत्र के घंसूरपुर निवासी गुरुदेव सिंह, अमरजीत सिंह, कमल सिंह, वीरेंद्र सिंह, अरविंद व चकमजिदपुर निवासी जयवृत सिंह के खिलाफ करीब 175 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया। बाद में पुलिस ने सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। करीब 11 साल में मुकदमे में 150 से अधिक बार सुनवाई हुई। न्यायालय ने आरोप पत्र व अभियोजन और विपक्ष के तर्कों को गंभीरतापूर्वक सुना।
हत्याकांड में मृतक प्रिंस के पिता, माता, भाई, पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और चचेरा भाई अहम गवाह बने। जबकि दोषियों को सजा दिलाने में एफएसएल रिपोर्ट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बीते मंगलवार को न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था, जबकि शुक्रवार को सजा के प्रश्न पर आखरी बार सुनवाई की। अभियोजन और विपक्ष के तर्कों को सुनने के बाद न्यायालय ने 30 मिनट में 53 पेज का फैसला में उम्रकैद की सजा सुनाई।
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नवनीत अपने बच्चों का मुंडन कराने आया था तिगरी धाम
अमरोहा। दोहरे हत्याकांड में मृतक नवनीत अपने दो छोटे बच्चों का मुंडन कराने के लिए तिगरी धाम आया था। मृतक प्रिंस नवनीत का ममेरा साला था। आरोपी नवनीत को बुलाने के लिए डेरे में आए थे। लेकिन, नवनीत अपने साथ प्रिंस को बुलाकर ले गया। आरोपियों ने दोनों को शराब में जहर देकर उनके शवों को गंगा में डाल दिया था। आज भी मृतक की पत्नी उस समय को याद करके सिहर जाती है। वह कहती है कि काश वे आरोपियों के साथ न गए होते तो नवनीत और प्रिंस जिंदा होते। संवाद