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भारतीय संस्कृति किसी में भेद नहीं करती : आरिफ मोहम्मद

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रजबपुर (अमरोहा)। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि भारतीय संस्कृति को ज्ञान की संस्कृति कहा जाता है। वह किसी में भेद नहीं करती। भारतीय संस्कृति ऐसी है कि काले, गोरे, भाषा, उपासना, श्रद्धा को समेटे हुए है। ऐसे में दुनिया भारत को विश्व गुरु नहीं कहेगी तो क्या कहेगी। कहा कि यदि मातृ शक्ति इस संस्कृति की धरोहर बन जाए आने वाली नस्लें खुद ही सुधर जाएंगी। उन्होंने ये विचार शनिवार को गुरुकुल चोटीपुरा में आयोजित हुए कार्यक्रम रखे।
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श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल विद्यालय में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर राष्ट्रीय वसुधैव कुटुंबकम संगोष्ठी में में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि बहुत महत्वपूर्ण विषय है वसुधैव कुटुंबकम। जो जी-20 का ध्येय वाक्य भी था। हमें अपनी संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। कहा कि वैदिक संस्कृति पर उन्होंने कि आदी शंकराचार्य ने पूरे देश में चार मठ स्थापित किए। जिसके आधार पर आध्यात्मिक संस्कृति का सूत्र पैदा किया। कहा कि ऐसे लोगों के व्यवहार पर शर्म आती है। जहां बेटी को दहेज के नाम पर जला दिया जाता है। लेकिन, भारतीय संस्कृति में आज भी बेटी पैदा होने पर कहते हैं लक्ष्मी पैदा हुई है। बेटियों में सरस्वती देखते हैं। लेकिन, उनका अनादर करना सही व्यवहार नहीं है। सांस्कृतिक और सभ्यता मूल्य अलग हैं। आदर्श के रूप में सिद्धांतों को नकार नहीं सकते हैं।
इससे पूर्व गुरुकुल की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर व मुंबई से आए साहित्यकार भी सम्मानित हुए। यह कार्यक्रम अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई व श्री वेंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस अवसर पर गुरुकुल की प्राचार्या डॉ. आचार्या सुमेधा, डॉ. राजीव त्यागी, डॉ. यतींद्र कटारिया, एडीएम सुरेंद्र सिंह, एएसपी राजीव कुमार व राहुल अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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