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एससी/एसटी एक्ट में पिता-पुत्र समेत तीन को दो-दो साल की सजा

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युवक के साथ मारपीट करने और जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने के मामले में न्यायालय ने पिता-पुत्र समेत तीन लोगों को दो-दो साल की सजा सुनाई। साथ ही इक्कीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। तीनों दोषी जमानत पर जेल से बाहर थे।
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यह मामला मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के गांव का है। यहां पर अनुसूचित जाति का परिवार रहता है, जो तालाब में मछली पालन कर परिवार का पालन-पोषण करता है। 25 जुलाई 2012 की मछली पालक का बेटा अपनी मां और नाबालिग बहन के साथ तालाब से घर वापस लौट रहा था। तभी गांव में रहने वाला बाइक सवार उसकी नाबालिग बहन को जबरदस्ती ले गया। मछली पालक के बेटे ने इसकी शिकायत आरोपी के पिता हरि सिंह से की तो उसने अपने दूसरे बेटे किशोरी सिंह और सतीश के साथ मिलकर मारपीट कर दी। गाली गलौज करते हुए जाति सूचक शब्द कहकर अपमानित किया था। पुलिस में कार्रवाई करने पर जान से मारने की धमकी दी थी। इस मामले में पीड़ित ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फिलहाल चारों आरोपी जमानत पर जेल से बाहर थे।
यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट तृप्ता चौधरी की अदालत में विचाराधीन था। बुधवार को न्यायालय में मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज सक्सेना ने पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने हरि सिंह, उसके बेटे किशोरी सिंह और सतीश को दोषी करार दिया। तीनों को दो-दो साल की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर इक्कीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक मछली पालक की नाबालिग बेटी को ले जाने वाला आरोपी नाबालिग है। उसका मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है।
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