अमरोहा। अमरोहा महोत्सव का सातवां दिन शेर-ओ-शायरी और कविताओं के नाम रहा। मशहूर कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों की खूब वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन को सुनने के लिए देर रात तक भीड़ जमा रहीं।
पहली बार आयोजित हो रहे अमरोहा महोत्सव का शबाब अपने चरम पर है। रोजाना अलग अलग तरह के कार्यक्रम लोगों को खूब भा रहे हैं। पहले दिन की भजन संध्या से शुरू हुआ महोत्सव सातवें दिन कवि सम्मेलन के नाम रहा। जहां दूर दराज से पहुंचे कई प्रख्यात शायरों ने अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही लूटी। यश भारती से सम्मानित सुप्रसिद्ध कवि डॉ. विष्णु सक्सेना ने कहा कि प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं, जख्म मिल जाएं तो मरहम खरीद सकता हूं, ये मानता हूं कि मैं दौलत नहीं कमा पाया, मगर तुम्हारे हर एक गम खरीद सकता हूं। कवयित्री मनिका दुबे ने कहा कि कोई अनबन, कोई शिकवा, कोई झगड़ा नहीं होगा, चलो वादा करें कि अब कोई गुस्सा नहीं होगा..., यही है प्रेम की ताकत, कि इक इंसान दुनिया में, परेशां हो भी सकता है, मगर तन्हा नहीं होगा...।
लखनऊ से पहुंचे सर्वेश अस्थाना ने कहा कि किसी गिरगिट की नेता से तुलना करना महापाप है, क्योंकि रंग बदलने के मामले में नेता गिरगिट का बाप है। अमरोहा के जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र गैर ने भी मंच पर अपनी प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि बात फूलों से जो आपकी हो गई, ये हवा फागुनी-फागुनी हो गई। इसके अलावा उन्होंने कहा कि -बांच न पाया इसको नजूमी कोई, ये हथेली मेरी खुरदरी-खुरदरी हो गई। इसके अलावा खुर्शीद हैदर, अना देहलवी, निगहत अमरोही, सरवर कमाल, डॉ. जमशेद कमाल, डॉ. शाकिर इस्लाही, अतुल वाजपेयी, मुकेश श्रीवास्तव, नजर बिजनौरी, शीबान कादरी, राहुल शर्मा, श्वेता सिंह, भुवन अमरोहवी आदि ने अपनी कविताएं और शायरी के कलाम पढ़े।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। जिसमें अपर जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह, एसडीएम सदर सुधीर कुमार, ईओ डॉ. बृजेश कुमार, एसडीएम नौगांवा बृजपाल सिंह समेत कार्यक्रम को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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