भाकिसं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भैयाराम मौर्य ने कहा कि किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य दिए बिना किसान का कल्याण होने वाला नहीं है। उन्होंने ग्राम स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। जीरखी के एक बैंक्वट हाल में भारतीय किसान संघ का जिला अभ्यास वर्ग विधिवत शुरू हुआ। स
उन्होंने भाकिसं की स्थापना से लेकर आज तक के कार्यकाल पर प्रकाश डाला। दत्तोपंत ठेंगड़ी ने 1979 में राजस्थान के कोटा शहर में किया था। स्थापना के समय 650 सदस्य बनाए गए। जिनकी संख्या वर्तमान में करोड़ों में है। स्थापना के समय से ही भाकिसं किसानों को उनकी फसलों के लाभकारी मूल्य दिलाने की वकालत करता आ रहा है। बड़े दुख का विषय है कि किसानों को लाभकारी मूल्य तो दूर फसलों का मूल्य निर्धारण भी वो लोग करते हैं, जो कभी खेतों में नहीं जाते। एसी में बैठकर फसलों की कीमतों को तय कर दी जाती है। प्रांतीय संगठन दौरान सुकर्म पाल सिंह राणा, भारत सिंह त्यागी, जिलाध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा, आलोक चौहान, चंद्र प्रकाश शर्मा, कोविंद्र सिंह, गंगाराम पुजारी, महीपाल सिंह, महावीर शर्मा, सतीश त्यागी, बृजनंदन सिंह, धर्मपाल सिंह, सुखदेव शर्मा, सुबोध शर्मा, फौजी तारा सिंह, अरविंद त्यागी आदि मौजूद रहे।