अमरोहा। अदबी संस्था अंजुमन यादगारे बका के तत्वावधान में कोलकाता से आए शायर अनवर हुसैन अंजुम के स्वागत में गजल की महफिल का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने बेहतरीन गजल सुनाकर श्रोताओं की खूब वाहवाही हासिल की।
रविवार की रात्रि नगर के मोहल्ला सराय कोहना स्थित स्वर्गीय मोहम्मद अहमद बका के आवास पर शायर अनवर अंजुम का शॉल ओढ़ाकर व बुके भेंटकर स्वागत किया गया। बाद में गजल की महफिल आयोजित की गई। अनवर हुसैन अंजुम ने कहा जो रखता नहीं अज्म परवाज का, जिगर उसका क्या होगा शहबाज का। मसरूर जौहर ने पढ़ा हर्फ कुछ उससे भी मंसूब करूंगा लेकिन, आ तो जाए वो मेरे कद के बराबर पहले। शहाब अनवर ने ऐसे पढ़ा किसी से कोई शिकायत नहीं मोहब्बत में, मैं अपने आप से लड़ता हूं खुद ही वहशत में। शीबान कादरी ने कहा न जाने उसपे मुझे इस कद्र यकीं क्यों था, के उसने झूठ भी बोला तो सच लगा मुझ को। अहमद रजा फराज ने यू कहा सिर्फ इतनी बात पर ताबीर बरहम हो गई, ख्वाब क्यों देखा कबीले की रिवायत के खिलाफ। नवाजिश नकवी ने पढ़ा है नफरत की तिजारत में खसारा, मोहब्बत में कोई घाटा नहीं है। फराज अर्शी ने इस तरह कहा दिल तो करता था के सीने से लगा लूं उसको, अक्ल इस बात पे तैयार जरा सी कम थी।
इनके अलावा रिजवान अमरोहवी, रईस अहमद आदि ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। गुलरेज आरिफ ने सभी का आभार व्यक्त किया। महफिल की अध्यक्षता अनवर हुसैन अंजुम ने की जबकि संचालन शीबान कादरी ने किया।
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