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Amroha News: नसीम बेग की टोपी के बिना अधूरी है होली की मस्ती

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अमरोहा। रंगाें और आपसी सौहार्द के त्योहार होली पर नसीम बेग के हाथाें बनी रंग-बिरंगी टोपी गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल बनेगी। यह टोपियां हुरियारों को भी भाईचारे के रंग से सराबोर करेंगी। उनकी टोपी के बिना यहां होली की मस्ती अधूरी ही है। अमरोहा ही नहीं अन्य जिलों और प्रदेशों में उनकी टोपियां अलग पहचान बन चुकी है। होली को देखते हुए होली की टोपियों की मांग बढ़ गई है। मांग को पूरा करने के लिए वह दिन रात टोपियों को तैयार करने में जुटे हैं।
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होली आपसी भाईचारे एवं सद्भाव का त्योहार है। जिसमें पुराने गिले शिकवों को भुलाकर लोग एक दूसरे के गले मिल त्योहार मनाते हैं। रंगों के इस त्योहार में नसीम बेग की बनाई टोपी भी हुरियारों में उत्साह का रंग भरेगी। यह पहला मौका नहीं है जब नसीम बेग की टोपी होली पर हुरियारों के सिर का ताज बनेगी। या यूं कहा जाए कि होली की मस्ती नसीम बेग की टोपी के बिना अधूरी ही है। अब होली के नजदीक आते ही नसीम बेग ने टोपियां बनाने का काम तेजी के साथ शुरू कर दिया है। उनकी बनाई अलग-अलग डिजाइन और रंगों की टोपियां हुरियारों को बेहद पसंद आती हैं। जिसकी डिमांड अमरोहा व आस पास के जनपद ही नहीं बल्कि दूसरे प्रदेशों में भी जमकर होती है।
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पचास सालों से टोपी बना रहे नसीम
शहर के मोहल्ला बटवाल निवासी नसीम बेग का टोपी बनाने का पुश्तैनी काम है। उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी इस काम में लगी है। वह लगभग पिछले पचास वर्षों से अलग-अलग त्योहारों व चुनाव के मौकों पर टोपी बनाने का काम करते हैं। अयोध्या में श्री राम मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भी उनकी बनाई जय श्रीराम लिखी केसरिया टोपी की खूब मांग हुई थी। अब होली पर उनके द्वारा बनाई गई टोपियां हुरियारों के सिर पर सजेंगी।
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दूसरे प्रदेशों से भी मिले ऑर्डर
अपने जिले और प्रदेश के दूसरे शहरों के अलावा अन्य प्रदेशों मध्य प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार आदि से भी नसीम बेग को होली की सात लाख टोपियों को तैयार करने के ऑर्डर मिले हैं। जिनको पूरा करने के लिए वह रात दिन टोपियां बनाने के काम में लगे हैं।
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सौ से अधिक महिलाओं को मिल रहा रोजगार
नसीम बेग की टोपियां बनाने के व्यवसाय ने सौ से अधिक महिलाओं को रोजगार दिया है। वह दिल्ली से आने वाले टोपियां बनाने के कच्चे माल की कटिंग कर महिलाओं को उपलब्ध कराते हैं। महिलाएं घरों से टोपियों की सिलाई कर वापस उनके पास पहुंचाती हैं। जिनको प्रति पीस के हिसाब से भुगतान किया जाता है। इस तरह महिलाओं को भी घर बैठे ही रोजगार मिल जाता है, और आय भी होती है।
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