अमरोहा। हेपेटाइटिस सी ने जिले में पैर पसार लिए है। लगातार मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 60 से 65 मरीज आ रहे है। जिला अस्पताल में जांच की सुविधा न होने के कारण सैंपल मेरठ लैब भेजने पड़ रहे हैं। बीते 90 दिनों में जिले में 4387 लोग हेपेटाइटिस सी की चपेट में आ चुके हैं। जिसमें से 200 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। 3014 मरीजों का इलाज पूरा हो चुका है। हालांकि अभी वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सके हैं।
सीएमओ डॉ. राजीव सिंघल ने बताया कि हेपेटाइटिस-सी लिवर से संबंधित एक वायरल इंफेक्शन है। इससे कई बार लिवर को बहुत ही गंभीर नुकसान पहुंचता है। अनदेखी पर लिवर फेलियर या कैंसर तक की नौबत आ जाती है, फिर मरीज की जान पर बन आती है। यह बीमारी इसलिए बेहद खतरनाक मानी जाती है क्योंकि आधे से ज्यादा संक्रमित लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनमें इसके लक्षण या तो दिखाई नहीं देते हैं या फिर सामने आने में ही दस साल तक लग जाते हैं। इसलिए चिकित्सक समय-समय पर रक्त की जांच कराने का सुझाव देते हैं।
ऐसे फैलता है संक्रमण
सीएमओ के मुताबिक हेपेटाइटिस सी का संक्रमण तब फैलता है, जब वायरस खून को संक्रमित कर फैलना शुरू कर देता है। इस वायरस के सात रूप हैं और सातों के 67 प्रकार हैं। मरीज को कौन सी दवा देनी है या इलाज का तरीका क्या होगा, यह वायरस के रूप पर निर्भर करता है। जिला अस्पताल में अब दवाएं मौजूद हैं। यहां इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है। केवल जांच रिपोर्ट आने में थोड़ी दिक्कत आ रही है। इसकी वजह ये है कि मेरठ लैब में लोड अधिक हैं।
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ये हैं काला पीलिया के लक्षण
. लगातार बुखार होना
.लगातार त्वचा और आंखों में पीलापन रहना
. थकान रहना
. भूख नहीं लगना
. ज्यादा उल्टी आना
. वजन कम होना और पेट में दर्द रहना
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ऐसे बरतें एहतियात
यदि कोई हेपेटाइटिस बी या सी से संक्रमित है तो उन्हें बहुत ज्यादा एहतियात बरतने की आवश्यकता है। संक्रमित व्यक्ति के सामान का इस्तेमाल करने से परहेज करें। साथ ही उसका झूठा खाना भी नहीं खाना चाहिए। चिकित्सक के मुताबिक उसके कपड़े, टूथ ब्रुश, बर्तन को अलग कर देना चाहिए।