जिले में डेंगू का खतरा मंडरा रहा है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारियां शुरू कर दी है। डेंगू से निपटने और मरीजों के उपचार के लिए जिला अस्पतालों में डेंगू वार्ड बनाकर छह बैड आरक्षित किए गए हैं। अस्पतालों में दवाओं की व्यवस्था भी की गई है।
जिले में वायरल पैर पसारने लगा है। बढ़ते मच्छरों के प्रकोप को देखते हुए डेंगू का डर सताने लगा है। पिछले साल जिले के करीब 95 गांवों में डेंगू फैला था। डेंगू के 757 और 52 मलेरिया के केस मिले थे। गर्मी बढ़ने के साथ ही मच्छरों का आतंक भी शुरू हो गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने भी तैयारी शुरू कर दी है। पिछले साल जहां डेंगू के केस मिले थे, स्वास्थ्य विभाग ने उन गांवों को चिह्नित कर संवेदनशील श्रेणी में शामिल कर रखा है। इनमें सबसे ज्यादा 17 गांव धनौरा ब्लाॅक के हैं, जबकि हसनपुर ब्लाॅक क्षेत्र के 16, जोया ब्लॉक क्षेत्र के 15, गजरौला क्षेत्र के 14, गंगेश्वरी ब्लॉक क्षेत्र के 11 और अमरोहा ब्लॉक क्षेत्र के 10 गांव शामिल थे।
इस साल भी इन गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की नजर है। इस साल अभी तक डेंगू का कोई केस नहीं मिला है। लेकिन, सेहत महकमा सतर्क हो गया है। खादर क्षेत्र के गंगा किनारे वाले 21 गांवों में एंटी लार्वा कीटनाशक दवा का छिड़काव, फॉगिंग कराई जा रही है। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि डेंगू और मलेरिया को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। जिला अस्पताल डेंगू वार्ड बनाकर बैड छह बैड आरक्षित किए हैं। जिससे डेंगू का मरीज मिलने पर उसे वार्ड में भर्ती कर उपचार कराया जा सके।