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हजरत इमाम हुसैन कुर्बानी देकर इंसानियत को बचाया : अख्तर

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अमरोहा। मौलाना डॉ. एहसन अख्तर ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों सहित कुर्बानी देकर केवल इस्लाम ही नहीं बल्कि आलम-ए-इन्सानियत को भी बचा लिया। इमाम हुसैन के साथियों की शहादत में सबसे पहले हजरत मुस्लिम ने अपनी शहादत दी। मजलिस के बाद हजरत मुस्लिम के ताबूत बरामद हुआ।
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नगर के मोहल्ला मंडी चौब में सफीरे हुसैन हजरत मुस्लिम के गम का आयोजन किया गया। हजरत इमाम हुसैन के शान्ति दूत हजरत मुस्लिम की शहादत को याद करते हुए मजलिस का आयोजन किया गया। मौलाना डॉ. एहसन अख्तर ने कहा कि पैगम्बर साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने देखा कि यजीद दीने इस्लाम को मिटाने के लिये अहंकार, अन्याय, अय्याशी तथा अरबों में पैगंबरे इस्लाम से पूर्व में फैली बुराइयों को अपना रहा था।
हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों सहित कुर्बानी देकर केवल इस्लाम ही नहीं बल्कि आलम-ए-इन्सानियत को भी बचा लिया। इमाम हुसैन ने कूफे के माहौल का जायजा लेने के लिए हजरत मुस्लिम को वहां भेजा था लेकिन, कूफे में जालिमों ने पहुंच कर जुल्म करने शुरू किए। पहले तो लोगों ने हजरत मुस्लिम का खैर मकदम किया लेकिन बाद में मुंह मोड़ लिया। अकेले हजरत मुस्लिम जालिमों की फौजों से लड़ते हुए शहीद हुए। यह कर्बला की घटना की पहली शहादत थी। मजलिस के बाद हजरत मुस्लिम के ताबूत बरामद हुआ।
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