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Amroha News: 300 साल पुराना है हसनपुर के शिवाला मंदिर का इतिहास

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हसनपुर (अमरोहा)।
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नगर के झारखंड महादेव शिवाला मंदिर का इतिहास 300 साल पुराना है। माना जाता है कि यहां सावन माह में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से मनोकामना पूरी होती हैं। हर वर्ष यहां महाशिवरात्रि पर मेले का आयोजन होता है। पूरे सावन मेले जैसा माहौल रहता है। सावन के प्रत्येक सोमवार श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
मान्यता है कि इस मंदिर के स्थान पर शंकर भगवान का शिवलिंग स्वयंभू निकला। इसलिए, भक्तों में इस मंदिर को लेकर अटूट आस्था है। हसनपुर कस्बे के अलावा दूर दराज के शिवभक्त श्रावण माह एवं फाल्गुन माह में हरिद्वार से कांवड़ लाकर यहां पर पूरे मनोभाव के साथ जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करते हैं। सावन में मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। मंदिर कमेटी के प्रबंधक अंकुर अग्रवाल का कहना है झारखंड महादेव शिवाला मंदिर का गौरवमयी इतिहास रहा है। यहां पर पौराणिक काल से शंकर भगवान के शिवलिंग पर जलाभिषेक होता चला आ रहा है।
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राकेश अग्रवाल बताते हैं कि महादेव मंदिर के स्थान पर किसी जमाने में झुंड झाड़ थे। एक घसेरे को घास छीलते हुए एक पत्थर दिखाई दिया। पत्थर समझकर उन्होंने अपने खुरपे को धार लगाई और घास लेकर घर चले गए। रात को सपने में उन्हें बताया गया कि जिस पत्थर पर उसने खुरपे को धार लगाई थी वह भगवान शंकर का शिवलिंग है। बुजुर्ग ने दिन निकलते ही सपने की बात लोगों को बताई। लोगों ने वहां जाकर देखा तो वास्तव में भगवान शंकर का शिवलिंग था। उसी दिन से लोगों ने सफाई करके यहां मंदिर की स्थापना कराई। इसलिए, इस मंदिर का नाम झारखंड रखा गया। शिवाला मंदिर में करीब तीन सौ साल से जलाभिषेक हो रहा है। शिवाला मंदिर के प्रति भक्तों में अटूट श्रद्धा है। सच्चे मन से मांगी गई भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। मंदिर कमेटी द्वारा समय समय पर सुंदरीकरण कराया जाता रहा है। सभी के सहयोग से मंदिर विकसित हुआ है। हसनपुर के अलावा आसपास के क्षेत्र के लोग भी यहां पर कांवड़ लाकर जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं।
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सावन माह में श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहती है। जो भी यहां सच्चे मन से भगवान महादेव से कुछ मांगता है तो उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। सावन माह में यहां जलाभिषेक करने के दौरान मांगी गई हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। -सत्यवीर गिरि महाराज, पुजारी
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