अमरोहा।। आज के समय में जहां इंग्लिश मीडियम शिक्षा की होड़ मची है, वहीं चोटीपुरा का श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय अपनी पुरानी सनातन परंपरा को आधार बनाकर कन्याओं को गुरुकुल पद्धति से न केवल शिक्षित कर रहा है, बल्कि भारतीय संस्कृति के साथ बालिकाओं को संस्कारवान भी बना रहा है। शिक्षा ही नहीं, इस गुरुकुल की बालिकाओं ने योग व कई अन्य खेलों में चोटीपुरा व अमरोहा के नाम का डंका बजाया है।
अमरोहा में लखनऊ-दिल्ली हाईवे से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर बना श्रीमद् दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा आज भी भारत की वैदिक परंपरा को संजोते हुए कन्याओं को गुरुकुल पद्धति से शिक्षा दे रहा है। जिले में इस वैदिक परंपरा की नींव चोटीपुरा गांव के ही किसान परिवार में जन्मी आचार्या डॉ. सुमेधा ने रखी। गुरुकुल में ही शिक्षा लेने के दौरान उन्हें अपने क्षेत्र के लिए वैदिक परंपरा से कन्याओं को शिक्षित व संस्कारवान बनाने की प्रेरणा मिली। शुरुआती दौर में छह बच्चों को लेकर गुरुकुल की स्थापना की। जिसके बाद आज के समय में देश के बीस प्रदेशों की करीब एक हजार से अधिक कन्याएं शिक्षा ग्रहण कर रहीं हैं।
आचार्या डॉ. सुमेधा अविवाहित रहकर जला रहीं शिक्षा की जोत
गुरुकुल का संचालन करने वाली एमए व वेदों में पीएचडी योग्यताधारी आचार्या डॉ. सुमेधा अविवाहित रहकर क्षेत्र में शिक्षा की जोत जला रही हैं। उनके पिता द्वारा विवाह के लिए जमा की गई पूंजी से उन्होंने गांव के बाहर दो कमरों का निर्माण कराते हुए गुरुकुल की स्थापना की। जिसके बाद आज के समय में दो कमरों का वह भवन विशाल महाविद्यालय का स्वरूप ले चुका है। जिसमें शिक्षित होने वाली बालिकाएं देश विदेश में अपना व चोटीपुरा का नाम रोशन कर रही हैं।
यहां की बेटियों ने तय किया ओलंपिक का सफर
गुरुकुल में शिक्षा लेने वाली बालिकाओं को पढ़ाई के साथ-साथ वेदों व खेलों में भी पारंगत किया जाता है। यही कारण है कि यहां की बेटियां योग में अपना परचम लहराए हुए हैं। वहीं, यहां से खेलों में निपुण हुई चार बेटियों सुषमा, रेनू, पुण्यप्रभा व सुमंगला ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में न केवल स्वर्ण झटका, बल्कि ओलंपिक तक का भी सफर तय किया।
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गुजरात के राज्यपाल की पौत्री ने भी ग्रहण की गुरुकुल में शिक्षा
गुरुकुल में देश भर के बीस से अधिक प्रांतों की बेटियां शिक्षा ग्रहण कर रही है। इसमें गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की पौत्री वरेण्या भी यहां से शिक्षा ले चुकी है।