गांव आजमपुर में चकबंदी कराना सरकारी मशीनरी के लिए मुसीबत बन गया है। बीते एक साल में चकबंदी को लेकर किसान संगठन ग्रामीणों के साथ कई बार आंदोलन कर चुके हैं। वहीं, सर्वेक्षण में क्षेत्र के 70 प्रतिशत लोगों ने चकबंदी कराने के लिए सहमति जताई, लेकिन दोबारा से चकबंदी कराने की रायशुमारी कराने से कुछ लाेगों में रोष है।
चकबंदी को लेकर किसानों के दो संगठनों में टकराव की स्थिति बन रही है। भाकियू टिकैत ने आरोप लगाया कि राजनैतिक दबाव में चकबंदी प्रक्रिया रोकने की कवायद की जा रही है। आजमपुर गांव में काफी समय से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। कुछ लोग चकबंदी कराने चाहते है तो कई लोग इसका विरोध कर रहे हैं। मई 2024 में प्रशासन ने ग्रामीणों से चकबंदी कराने के लिए राय मांगी थी। राजस्व विभाग के कर्मियों ने 1276 खातेदारों को एक फार्म देकर उस पर चकबंदी कराने या नहीं कराने के लिए लिखित राय मांगी थी। तत्कालीन चकबंदी अधिकारी ने नौ मई 2024 को ग्रामीणों के बीच कराए सर्वेक्षण की रिपोर्ट शासन को भेजी थी। इसमें 923 खातेदारों ने चकबंदी कराने और 353 ने नहीं कराने के पक्ष में राय दी थी।
भारतीय किसान यूनियन टिकैत के युवा इकाई के पूर्व जिलाध्यक्ष गुरमीत सिंह का कहना है कि 70 प्रतिशत खातेदार चकबंदी कराना चाहते है। उन्होंने राजनैतिक दबाव में चकबंदी की प्रक्रिया बाधित करने की साजिश करने का आरोप लगाया है। वहीं, भाकियू असली के जिला प्रवक्ता नरेश कुमार ने भी चकबंदी कराने की मांग की है। उधर, भाकियू शंकर के जिलाध्यक्ष सत्यपाल सिंह का कहना है कि जब तक ग्रामीणों की भूमि को झील में दर्ज करने का विवाद नहीं सुलझ जाता है, तब तक चकबंदी नहीं होने दी जाएगी। दरअसल, आजमपुर क्षेत्र में दबंगों ने बड़े पैमाने पर ग्राम समाज और दूसरों की भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है। ऐसे लोग भी चकबंदी नहीं होने देना चाहते हैं। बुधवार को गांव आजमपुर में एसडीएम की मौजूदगी में हुई पंचायत में हुआ हंगामा भी इसी को लेकर हुआ था।