अमरोहा। पशुओं को खुरपका और मुंहपका रोग से बचाने के लिए जनपद में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें 15 सितंबर तक छह लाख 58 हजार पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
आम तौर पर खुरपका एवं मुंहपका रोग में सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा समय समय पर इससे बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। इस बीमारी से पशुओं को तो परेशानी होती ही है, साथ में पशुपालक को भी आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। इस बीमारी में पशुओं के दूध का उत्पादन काफी कम हो जाता है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. खुशीराम सिंह ने बताया कि जनपद में इस समय पशुओं को मुंहपका एवं खुरपका रोग से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
एक अगस्त को शुरू किया गया यह अभियान 15 सितंबर तक चलाया जाएगा। जनपद भर में छह लाख 58 हजार पशुओं को टीके लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जिनमें दो लाख 92 हजार 827 वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि जिस गांव में टीकाकरण होता हैं, वहां पशुधन विभाग की टीम एक दिन पहले ही सूचना दे देती है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि खुरपका, मुंहपका टीकाकरण अभियान में पशुपालन विभाग से आई टीम का सहयोग करें और टीका लगवाएं। जिन लोगों के पशु टीकाकरण से छूट गए हैं, वह भी पशु चिकित्सालय पर सूचना दे दें। जिससे छूटे हुए पशुओं को भी टीका लगाया जा सके।
खुरपका एवं मुंहपका बीमारी के लक्षण
- तेज बुखार आता है, जो 105 से 106 डिग्री तक पहुंच जाता है।
- पशुओं के पैरों एवं मुंह मे छाले पड़ जाते हैं।
- पशुओं के मुंह से लार टपकती रहती है।
- पैरों में खुरों के बीच जख्म बनने लगते हैं।
- पशु चारा खाना छोड़ देता है, दूध देने की क्षमता भी कम हो जाती है।
- तेज बुखार के कारण पशुओं में गर्भपात की आशंका भी बनी रहती है।