गजरौला (अमरोहा)। बिजनौर बैराज से 165219 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बावजूद तिगरी गंगा का जल स्तर दस सेंटीमीटर कम होकर 201 मीटर हो गया। जो खतरे के निशान से एक मीटर दूर है, लेकिन गंगा किनारे व टापू में बसे गांवाें के ग्रामीणों की बाढ़ के कारण समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। खेतों में पानी भरा होने के कारण चारा, लौकी, तोरई की फसल नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई हैं। ओसीता जगदेवपुर के ग्रामीण पानी में डूब कर खेतों से चारा लाने के लिए मजबूर हैं।
रविवार को तिगरी में गंगा का जल स्तर 201.10 मीटर था, लेकिन सोमवार को दस सेंटीमीटर कम होकर जल स्तर 201 मीटर दर्ज किया गया, जबकि बिजनौर बैराज से गंगा में 165219 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पानी कम होने के बावजूद दारानगर, शीशों वाली, भुड्डी वाली, झंगीर वाली, टीकों वाली आदि टापू में बसे गांवों के ग्रामीणों का दुश्वारियां कम नहीं हुईं। खेतों में बाढ़ का पानी बरकरार है। जिससे ग्रामीणों को खेतों से चारा लाने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ओसीता जगदेवपुर के खेतों को जाने वाले मुख्य रास्ते में इस कदर पानी भरा है कि बुग्गी डूब जाती है। चकनवाला, अलीनगर, मुरादपुर, पपसरा खादर, तिगरी, मोहम्मदाबाद, कबीरपुर के ग्रामीणों के खेत जल मग्न हो गए हैं। धान, लौकी, तोरई, चारा आदि फसलों के नष्ट हो जाने का खतरा बढ़ गया है।
बाढ़ में बहकर आए रहे जहरीले जीव-जंतु
गंगा और राम गंगा पोषक नहर में आई बाढ़ के कारण जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ में सांप, बिच्छू, मगरमच्छ, गोह आदि जहरीले और खतरनाक जीव-जंतु बाढ़ में बहकर आए हैं। बाढ़ से बचने के लिए सांप खेतों में खड़े पेड़ों पर चढ़ गए। जिनके नीचे किसी ग्रामीण के बैठने पर डसने का खतरा रहता है।
महिला को सांप ने डसा
दारानगर गांव निवासी रोहताश की पत्नी घर में सो रही थी। उसे सांप ने डस लिया। रात में ही परिजन झाड़ फूंक वाले के पास ले गए। जहां पर उसका इलाज कराया। सपेरों से भी जड़ी बूटी दिलाई। बाद में परिजन उसे चिकित्सक के यहां ले गए। इलाज के बाद उसी हालत में सुधार हो गया।