सभासद का चुनाव हार गए थे गजरौला नपं अध्यक्ष अनिल कुमार गर्ग और रंजना सिंह
गजरौला (अमरोहा)। गजरौला चाहे नगर पंचायत रहा हो या नगर पालिका, यहां पर सभासद और अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनावों में बड़े रोचक किस्से व तथ्य सामने आए। जिनका लोग आज भी जिक्र करते हैं।
अध्यक्ष पद का चुनाव जीत कर कुर्सी पर विराजमान हुए अनिल कुमार गर्ग आठ वोट से सभासद का चुनाव हार गए। महेंद्र सिंह की पत्नी भी सभासद का चुनाव नहीं जीत पाईं। उनको महज 51 वोट मिले।
चुनाव छोटे हुए हों या बड़े, यहां के मतदाताओं ने हमेशा लीक से हटकर मतदान किया। नगर पंचायत के सबसे पहले चुनाव में मतदाताओं ने नगर को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने वाले और प्रदेश सरकार में तत्कालीन नगर विकास मंत्री रमाशंकर कौशिक के करीबी जसराम सिंह को पराजित कर निर्दलीय प्रत्याशी अनिल कुमार गर्ग को कुर्सी पर बैठने का मौका दिया तो इसके बाद कभी भी अनिल कुमार गर्ग को चुनाव नहीं जिताया।
हैरान करने वाली बात यह है कि 2006 में नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने पर चौथे स्थान पर खिसक गए। इतना ही नहीं उन्होंने 2000 में सभासद का चुनाव लड़ा, लेकिन आठ वोट से चुनाव हार गए। उनको 412 वोट मिले थे, जबकि विजेता गुलशन ने 420 वोट हासिल किए।
महेंद्र सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह सपा के समर्थन से 2001 में चुनाव जीत कर नगर पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर पहुंचे। मगर इसके बाद जनता ने उनका भी विश्वास नहीं किया। जहां 2006 में निर्दलीय लड़ने पर उनको करीब ढाई हजार वोट मिले। वहीं उनकी पत्नी ने 2017 सभासद के लिए किस्मत आजमाई। जीतना तो दूर उनको महज 51 वोट पर संतोष करना पड़ा।
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह कहते हैं कि वह चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे, लेकिन पत्नी यह कहती थीं कि नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव मेरे कारण जीते हैं। उनको जमीनी हकीकत से अवगत कराने के लिए नामांकन कराया, लेकिन बाद में समाज के व्यक्ति के समर्थन में वह बैठ गए। तब तक नाम वापसी की तारीख निकल चुकी थी। इसके बाद भी उनकी पत्नी को 51 वोट मिल गए थे।