जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग का महत्व बताया। पंडित जितेंद्र भार्गव ने कहा कि जीवन में इच्छाओं का त्याग करना ही उत्तम त्याग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में त्याग की भावना सर्वाधिक होती है। इस अवसर पर सामूहिक आरती की गई।
पंडित भार्गव ने कहा कि उत्तम त्याग की भावना जैन समाज में सर्वाधिक होती है। जैन समाज के संत केवल अपने घर का ही त्याग नहीं करते हैं, बल्कि वे कपड़ों तक का भी त्याग कर देते हैं। संत पूरा जीवन दिगंबर मुद्रा धारण कर बिता देते हैं। उनका कहना था कि मनुष्य की शक्ति का प्रदर्शन धन-दौलत से नहीं बल्कि उसके त्याग से की जाती है। उन्होंने कहा कि अपनी इच्छाओं को वश में करना ही उत्तम त्याग का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। त्याग की भावना मनुष्य की आत्मा को शुद्ध बनाती है। इस अवसर पर सामूहिक आरती की गई। अनिल जैन, जिनेंद्र जैन, कौशल जैन, सुशील जैन, विकास जैन, नीरज जैन, सरला जैन, शारदा जैन, महावीर जैन मौजूद रहे।