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बिना ड्यूटी वेतन लेनी वालीं तत्कालीन एसीएमओ डॉ इंदुबाला के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर

सार

बिना ड्यूटी किए वेतन लेने वाली रिटायर्ड एसीएमओ डॉ. इंदुबाला बुरी तरह फंस चुकी हैं।सीओ सिटी विजय कुमार राणा ने बताया कि डॉ. इंदुबाला के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।इसके साथ ही महिला डिप्टी सीएमओ को सस्पेंड करने के लिए शासन को पत्र भेजा था।
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विस्तार
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बिना ड्यूटी किए वेतन लेने वाली रिटायर्ड एसीएमओ डॉ. इंदुबाला बुरी तरह फंस चुकी हैं। उनके खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। विभागीय अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने छल कपट करने का मौका पाकर हस्ताक्षर करके बेईमानी से वेतन लिया है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
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मार्च 2022 में स्वास्थ्य विभाग में चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिसके बाद डीएम बीके त्रिपाठी ने मामले की जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी। 30 सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने विभागीय अफसरों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था। डिप्टी सीएम के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. इंदु बाला को निलंबित कर दिया गया था। ये निलंबन डॉ. इंदु के सेवानिवृत्त होने के दो महीने बाद हुआ था। जबकि तत्कालीन सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल पर भी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वहीं लगातार वेतन बनाने वाले लिपिक संतोष कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने और इस फर्जीवाड़े में संलिप्त अन्य कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए थे। जिसके बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आननफानन में बड़ी कार्रवाई कर दी है।
शुुक्रवार को सीएमओ डॉ. राजीव सिंघल के निर्देश पर एसीएमओ डॉ. गोपीलाल ने नगर कोतवाली में रिटायर्ड एसीएमओ डॉ. इंदु बाला के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई है।
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आरोप है कि रिटायर्ड एसीएमओ डॉ. इंदु बाला ने अपनी नियुक्ति के दौरान कार्यालय में न आने के बावजूद बिना कार्य किए ही छह (माह अगस्त 2021 से जनवरी 2022 तक) माह का वेतन लिया है। जिसे तत्कालीन सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल के निर्देशानुसार निर्गत किया गया। आरोप है कि डॉ. इंदुबाला द्वारा छल कपट करने का मौका पाकर हस्ताक्षर करके बेईमानी से वेतन लिया गया है। सीओ सिटी विजय कुमार राणा ने बताया कि डॉ. इंदुबाला के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
मार्च 2022 में स्वास्थ्य विभाग में चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिसमें चार साल तक बिना ड्यूटी किए वेतन लेने का आरोप था। इस मामले में डीएम बीके त्रिपाठी ने तत्कालीन सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल व अकाउंटेंट समेत महिला डिप्टी सीएमओ डॉ. इंदुबाला के अभिलेखों के साथ तलब किया था। डीएम के सख्त रुख को देखकर बिना ड्यूटी के वेतन जारी करने का कबूल कर लिया था। जबकि इंदु बाला का वेतन करीब ढाई लाख रुपये प्रति माह था। इस पर डीएम ने सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल समेत एकाउंट को जमकर फटकार लगाई थी। इसके साथ ही महिला डिप्टी सीएमओ को सस्पेंड करने के लिए शासन को पत्र भेजा था। इतना ही नहीं बिना ड्यूटी के फर्जी हाजिरी लगाकर उनका वेतन देने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। तभी से ये मामला शासन स्तर पर पेंडिंग चल रहा था। जिसके आधार पर तीस सितंबर को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने विभागीय अफसरों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था।
एसीएमओ डॉ. गोपीलाल ने बताया कि मुरादाबाद के मोहल्ला बुद्धि बिहार निवासी रिटायर्ड डिप्टी सीएमओ डॉ. इंदु बाला सात जून 2018 से सीएमओ कार्यालय में बतौर उप जिला कुष्ठ अधिकारी तैनात थीं। इस दौरान उनके पति डॉ. अजय वर्मा मथुरा में सीएमओ थे। आरोप है कि वह कभी कार्यालय नहीं आती थीं। ये भी चर्चा है कि उनकी तैनाती के दौरान डॉ. इंदु की उनके कार्यालय के तैनात कर्मचारियों तक ने सूरत नहीं देखी थी। जबकि वह हर महीने पूरा वेतन लगभग ढाई लाख रुपये लेती रहीं।
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