कस्बे में रसूले खुदा की वफात और इमाम हसन शहादत पर ताबूत बरामद किया गया। इमाम बारगाह में रातभर शब्बेदारी का सिलसिला चला। स्थानीय अंजुमनों के साथ ही बाहर से आई अंजुमनों ने सीनाजनी कर मातम बरपा किया।
28 सफर का दिन रसूले खुदा की वफात और इमाम हसन की शहादत से मंसूब माना जाता है। इसी सिलसिले में रविवार रात शाहफरीद स्थित इमाम बारगाह नंबरदारनी में मजलिस का आयोजन किया गया। मोहम्मद ताहिर व उनके हमनवां ने मर्सिया ख्वानी की। रामपुर से आए मौलाना इकरार रजा ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि रसूले खुदा और इमाम हसन के दिखाए हुए रास्ते पर चलने की हिदायत दी। मजलिस के बाद पूरी रात मातम का सिलसिला चलता रहा। सुबह में सभी अंजुमन जुलूस की शक्ल में ताबूत के साथ साथ कटकुई, मैन बाजार, दौलत शहीद, हफ्ता बाजार होती हुई कर्बला पहुंचीं। यहां सभी अजादारों में तर्बरूक तकसीम किया गया। इस दौरान शिबाल हैदर, नूर अब्बास राणा, वक्कार हैदर, शजर अब्बास, मोहम्मद अब्बास मुन्ना, तनवीर इमाम आदि मौजूद रहे।