गंगा का जलस्तर तो कम हो गया है, लेकिन टापू में बसे और खादर के गांवों के लोगों को कभी न भुलाने वाले गम दे दिए हैं। जलस्तर कम होने पर बाढ़ की तबाही का मंजर साफ दिखाई देने लगा है। दारानगर में बाढ़ के कारण खड़ंजा बह गया, जबकि शीशों वाली सहित कई गांवों को जोड़ने वाली सड़क भी बाढ़ में कट गई। बाढ़ कम होने के साथ टापू में बसे गांवों के मार्ग कीचड़ से भर गए हैं। शिक्षक पानी और कीचड़ से गुजरने को मजबूर हैं।
तिगरी में गंगा का जल स्तर 201.45 मीटर तक पहुंच गया था। यह खतरे के निशान 202 मीटर से 55 सेंटीमीटर दूर रह गया था। कई दिन से गंगा का जल स्तर लगातार कम होकर मंगलवार को 200.80 मीटर पर ठहर गया। ऊंचे खेतों से पानी निकल गया। मगर निचले इलाकों में पानी भरा हुआ है। खेत बाढ़ के पानी से लबालब हैं। बाढ़ का पानी कम हो जाने के कारण खेतों में फसलों के सड़े और गले अवशेष साफ दिखाई देने लगे हैं। दारानगर को जाने वाले रास्ते में कीचड़ भर गई है। जिससे गुजरने में ग्रामीणों और गांव के परिषदीय विद्यालय में तैनात शिक्षकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाह नाला तक आने जाने में पसीने छूट जाते हैं। बुग्गी में दूध की केन आदि को लाद कर बाह नाला तक पहुंचाते हैं। यहां से नाव में लाद कर पार कर रहे हैं। गांव का खड़ंजा बाढ़ के कारण कट गया। गांव के परिषदीय विद्यालय में भरा बाढ़ का पानी निकल चुका है। थोड़ा पानी परिसर में रह गया है, लेकिन सूखने में समय लगेगा। चकनवाला के सामने शीशों वाली सहित कई गांवों को जोड़ने के लिए बनी डामर की सड़क भी पानी में कई स्थान से कट गई और जगह-जगह से बह गई। इस कारण उस पर वाहन लेकर गुजर नहीं सकते। सड़क पर बने गड्ढे पानी में दिखाई नहीं दे रहे। जिससे हादसा होने का खतरा बना रहता है।
सुनपुरा खादर को कटान से बचाने के लिए कार्य जारी
गजरौला। सुनपुरा खादर गांव को गंगा में आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए बने तट बांध की तरफ जा रही जलधारा को रोकने में बाढ़ खंड विभाग के पसीने छूट रहे हैं। गांव सामने बनीं पत्थर की दो ठोकरों को कटान का खतरा पैदा हो गया है। जिनको बचाने के लिए बाढ़ खंड विभाग बीते तीन दिन से कवायद में जुटा है। रविवार को पेड़ों की शाखा और डाली कटवा कर जलधारा में डलवाई गईं। सोमवार को बल्लियां लगवाई गईं। बल्लियां लगाने का काम तीसरे दिन मंगलवार को भी जारी रहा। पत्थर की दोनों ठोकर के बीच में कटान कर रही गंगा की जलधारा को रोकने में बाढ़ खंड विभाग के पसीने छूट रहे हैं। बाढ़ खंड विभाग के जेई सुभाष चंद्र गहलौत का कहना है कि कटान नियंत्रण में है।