अमरोहा। खाने पीने की चीजों में मिलावट का धंधा जिले में बड़े स्तर पर चल रहा है। जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए सरसों का तेल, मावा एवं वनस्पति घी तक मिलावटी पाया गया है। नमूने फेल होने के बाद एडीएम कोर्ट ने दस मामलों में 11.25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट पर लगाम कसने के लिए समय समय पर अभियान चलाकर नमूने एकत्र किए जाते हैं। जांच में फेल होने पर एडीएम कोर्ट में परिवाद के बाद जुर्माने की कार्रवाई होती है। पिछले समय में विभाग द्वारा लिए गए सरसों के तेल, मावा एवं वनस्पति घी के नमूने जांच में फेल हो गए। जिसके बाद एडीएम कोर्ट ने उन पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। सरसों का तेल नमूने में फेल होने पर अमरोहा के मढै़या कमरूद्दीन निवासी पवन कुमार पर 65 हजार रुपये, हसनपुर के मोहल्ला होलीवाला निवासी खालिद पर 60 हजार रुपये, बिजनौर के शिवाला कला थानांतर्गत ग्राम ईस्माइलपुर निवासी उस्मान का मिल्क केक का नमूना फेल होने पर पचास हजार रुपये, रजबपुर के मुबारकपुर निवासी नितिन शर्मा का दूध का नमूना फेल होने पर पचास हजार रुपये, गजरौला के ग्राम कटाई निवासी मुशर्रफ खान निवासी के अभिलेख अधूरे पाए जाने पर धारा 55 के तहत एक लाख रुपये, अमरोहा के मोहल्ला दानिश मंदान निवासी अब्दुल हसन का दूध का नमूना फेल होने पर एक लाख रुपये, अमरोहा के मोहल्ला तकिया हुसैनशाह निवासी नफीस अहमद का सरसों के तेल का नमूना फेल होने पर एक लाख रुपये, अमरोहा के ही मोहल्ला अहमद नगर निवासी मोहम्मद नौशाद का सरसों का तेल का नमूना फेल होने पर एक लाख रुपये, गजरौला के मोहल्ला महाजन बस्ती निवासी गौरव गोयल का मावा का नमूना फेल होने पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, गगन वनस्पति घी का नमूना अमरोहा के मोहल्ला दरबार कलां निवासी आलोक माहेश्वरी पर पचास हजार रुपये, फर्म भगवानदास रघुवीर सरन मोहल्ला दरबार कलां पर पचास हजार रुपये, डिब्ट्रीब्यूटर विघलेश ट्रेडर्स पर एक लाख रुपये, गाजियाबाद स्थित निर्माता एवं पैकर्स केआर फूड लिमिटेड पर एक लाख रुपये एवं मार्केटिंग कंपनी बाय-बुंगे इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पर एडीएम कोर्ट द्वारा एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
मिलावटी खाने से किडनी और पेट संबंधी रोग हो सकते हैं। ऐसे खाने से दूर रहें। मिलावटी तेल और घी का दिल पर तेजी से असर होता है। धमनियों में चिकनाई जम जाती है। हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।- डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ अमरोहा
ऐसे करें पहचान
सरसों के तेल की ऐसे करें पहचान
सरसों के तेल में हाइड्रोक्लोरिक एसिड नीचे साफ दिखता है और इसमें किसी भी तरह का रंग बदलता नहीं होता है तो ये शुद्ध तेल है, जबकि अगर मिलावटी तेल होगा तो इससे हाइड्रोक्लोरिक एसिड के रंग में परिवर्तन दिखाई देगा।
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मिलावटी घी की ऐसे करें पहचान
एक कटोरी में एक चम्मच घी लें। उसमें थोड़ा सा नमक और हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिलाकर उसे 20 मिनट तक छोड़ दें। अगर आपको घी में कोई कलर नहीं दिखता है, तो समझो वह शुद्ध है।
मिलावटी दूध की ऐसे करें पहचान
दूध में मिलावट का पता लगाने के लिए गरम दूध में नींबू का रस डाल दें। अगर शुद्ध दूध होगा तो उसका पनीर बन जाएगा। नकली होने पर दूध का पनीर नहीं बनेगा।
कितने समय में खराब हो सकती हैं मिठाइयां
विशेषज्ञों के अनुसार यदि मिठाइयां फ्रिज में नहीं रखी गई है, तो चौबीस घंटे में खराब हो सकती है। फ्रिज में रखी हुई मिठाइयां एक सप्ताह तक चल सकती हैं। यदि जिस स्थानों पर मिठाइयों को रखा गया है, वहा नमी व गंदगी है तो जल्द मिठाइयां खराब हो सकती है।
चौदह दिन में जांच रिपोर्ट आने का प्रावधान
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त विनय कुमार ने बताया कि खाद्य पदार्थ असली हैं या नकली, इसकी जांच प्रयोगशाला द्वारा की जाती है। सैंपल की जांच रिपोर्ट 14 दिन में आने का प्रावधान है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने में कई माह का समय लग जाता है।
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लचर कार्यप्रणाली है जिम्मेदार
लचर प्रशासनिक कार्यप्रणाली के कारण मिलावटखोरों पर पूरी तरह से शिकंजा नहीं कस पाता है। मिलावट के लगभग सभी मामलों में जुर्माना लगता है, सजा नहीं हो पाती है। जिले में पिछले पांच साल में सजा का कोई मामला नहीं है। हालांकि, भारतीय दंड संहिता में मिलावटखोरों पर कड़ी सजा का प्रावधान है, लेकिन मिलावट से संबंधित 90 फीसदी मामले प्रशासनिक कोर्ट में स्थानांतरित हो जाते हैं, जिस कारण वह न्यायालय की कार्रवाई से बच जाते हैं और उन्हें सजा नहीं हो पाती है।
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