अमरोहा। प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार को कैबिनेट की बैठक में बीस रुपये गन्ना मूल्य की बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास किया। चुनावी साल में चार सौ रुपये गन्ना मूल्य की आस लिए बैठे किसानों को प्रदेश सरकार का यह प्रस्ताव रास नहीं आया है। किसानों एवं किसान संगठनों ने इसे नाकाफी बताते हुए बढ़ाए गए गन्ना मूल्य से असंतोष व्यक्त किया है।
गन्ना पेराई सत्र के लगभग तीन माह पूरे होने को हैं। इसके बाद भी प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य की घोषणा नहीं की थी। 2024 चुनाव का साल है, लिहाजा किसानों को प्रदेश सरकार से अच्छे गन्ना मूल्य की आस थी, लेकिन सरकार की बीस रुपये बढ़ोतरी की घोषणा के बाद किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। लंबे इंतजार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। अब 370 रुपये प्रति क्विंटल गन्ने का भाव हुआ। किसान नेता घोषित गन्ना मूल्य को उम्मीद से बहुत कम बता रहे हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को फसलों की लागत और महंगाई को देखते हुए कम से कम गन्ना मूल्य 400 घोषित करना चाहिए था। अब बढ़ोतरी के बाद गन्ना मूल्य 360 और 370 प्रति क्विंटल हो गया है।
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यूपी में डबल इंजन सरकार ने गन्ना मूल्य वृद्धि को लेकर किसानों के साथ दोहरी नीति अपनाने का काम किया है। इस बार चार सौ रुपये प्रति कुंतल गन्ना मूल्य की घोषणा करनी चाहिए थी। पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी डबल इंजन की सरकार है, लेकिन वहां भी यूपी के मुकाबले गन्ना मूल्य अधिक दिया जा रहा है। जबकि मजदूरी ओर गन्ना फसल की लागत दोनों राज्यों में लगभग बराबर ही है। - चौधरी दिवाकर सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू (शंकर)
प्रदेश सरकार द्वारा गन्ना मूल्य पर बीस रुपये प्रति कुंतल बढ़ाना किसान हित में तो है, लेकिन यह किसानों के लिए नाकाफी है। कम से कम 50 रुपये की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। जिससे गन्ने का मूल्य चार सौ रुपये हो जाता। नरेश चौधरी, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन (चढूनी)।
गन्ना मूल्य के लिए उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हुई है। चुनावी साल में किसानों को सरकार ने झटका दिया है। पेराई का आधा सीजन बीतने के बाद भी केवल बीस रुपये की मामूली बढ़ोतरी की गई है। जोकि किसानों के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।- डॉ सुमित कुमार नागर, राष्ट्रीय सचिव भाकियू (लोक शक्ति)
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सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। सरकार एक तरफ तो किसानों की आय दोगुना करने की बात करती है, वहीं किसान को उसकी फसलों का दाम भी पूरा नहीं मिल पा रहा है। कम से कम पचास रुपये की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। - चौधरी उमेद सिंह, राष्ट्रीय महासचिव प्रदेश उपाध्यक्ष, भाकियू, चौहान गुट
सरकार किसान को ठगने का काम कर रही है। फसलों का दाम भी ठीक से नहीं मिल पा रहा है। बीच पेराई सत्र में मामूली बढ़ोतरी की गई है। कम से कम साढ़े चार सौ रुपये की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। - रामपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू, टिकैत गुट
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गत वर्षो में सरकार कोई रुपया नहीं बढ़ाया था और चुनावी साल मैं 20 रुपये बढ़कर किसानों से वाह-वाही लूटना चाहती है। लेकिन सच्चाई इसके उलट है। हर वर्ष खाद और दवाइयों के रेट बढ़ते हैं, लेकिन गन्ने का कोई रेट नहीं बढ़ता। यह मूल्य गन्ना किसानों के लिए ना काफी है। गुरमीत सिंह, पश्चिम युवा प्रदेश महासचिव, भाकियू टिकैत
शुगर मिलों को करना होगा 48 करोड़ का और भुगतान
जिले में 98 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती जाती है। जिसमें 1.69 लाख किसान जिले की तीन एवं गैर जनपदों की आठ शुगर मिलों को गन्ने की सप्लाई करते हैं। अभी तक सभी शुगर मिलों ने 240 लाख क्विंटल गन्ने की खरीद की है। फिलहाल शुगर मिलें पुराने रेट के अनुसार ही गन्ना मूल्य का भुगतान कर रहीं थी। लेकिन बीस रुपये की बढ़ोतरी के बाद शुगर मिलें किसानों को अभी 48 करोड़ रुपये का भुगतान और करना होगा। मनोज कुमार, डीसीओ।
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किस मिल पर कितना बकाया
शुगर मिल बकाया राशि (करोड़ रुपये में)
वेव शुगर मिल, मंडी धनौरा - 9.41
सहकारी शुगर, मिल हसनपुर - 9.13
त्रिवेणी शुगर मिल, चंदनपुर - 2.12
दीवान शुगर मिल, अगवानपुर - 11.64
राणा शुगर मिल, करीमगंज - 3.71
राणा शुगर मिल, बेलबाड़ा - 1.33
त्रिवेणी शुगर मिल, मिलक नरायणपुर - 0.93
कुल बकाया - 38.27 (यह बकाया पुराने रेट के अनुसार है।)