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तीन करोड़ से अधिक खर्च फिर भी अधूरे पड़े कई सरोवर

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जिले में तालाबों को सरोवर बनाने की मुहिम परवान नहीं चढ़ पा रही है। शुरुआत के दिनों में तेजी से तालाबों को अमृत सरोवर बनाने की कवायद शुरू हुई जो अब थम गई है। जनपद में बनने वाले 75 सरोवर पर मनरेगा के तहत तीन करोड़ का खर्च हो चुका है। बावजूद इसके तालाबों का कार्य अधूरा पड़ा है। जिम्मेदार भी तालाबों के सुंदरीकरण को लेकर गंभीर नहीं है। जबकि यह सरकार की महत्वपूर्ण योजना है। सरकार की मंशा थी किअमृत सरोवर में तालाब का चयन होने से कोई कब्जा नहीं कर पाएगा। उधर जिम्मेदार तालाबों का कार्य पूर्ण करने होने का दावा कर रहे हैं।
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जनपद में प्रशासन ने 75 तालाबों को अमृत सरोवर बनाने का निर्णय लिया था, जिसके तहत उनको चिह्नित किया गया था। मनरेगा योजना से उनमें कच्चा काम कराया गया था। इनमें उनकी साफ-सफाई के अलावा खोदाई, समतलीकरण और पटरियां बनाने का कार्य शामिल रहा। सरकार के निर्देशानुसार एक एकड़ जमीन से कम कोई तालाब सरोवर नहीं बनाया जाना है। सरकार ने एक तालाब को अमृत सरोवर बनाने की लागत न्यूनतम दस और अधिकतम 24 लाख रुपये रखी है। नगर निकायों के पांच तालाबों को छोड़कर अन्य में मनरेगा मजदूर लगाकर काम किया गया। पंद्रह अगस्त को सरोवर तालाबों पर ध्वजारोहण होना था। इसलिए प्रशासन ने आनन-फानन में तालाबों को कब्जा मुक्त कराया। इस दौरान प्रशासन ने तेजी दिखाई लेकिन स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने के बाद तालाबों को सरोवर बनाने कार्रवाई पर लगाम लग गई है। गांव-गांव सरोवर तालाबों का कार्य अधर में लटका है। अभी तक अधिकांश तालाबों में केवल मनरेगा के तहत कच्चा कार्य हो पाया है। जबकि कई तालाबों का पक्का कार्य अधर में लटका है। विभागीय सूत्रों की माने तो तालाबों को सरोवर बनाने में करीब तीन करोड़ से अधिक रुपये खर्च हो चुके हैं।
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