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सबके राम : छिपते छिपाते कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे थे गजरौला के तीन दोस्त

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गजरौला। अयोध्या में कार सेवा के लिए नगर के तीन दोस्त सुभाष चंद्र शर्मा, डॉ.अनित रस्तोगी और विनोद अग्रवाल उर्फ हीरा लाल करीब पांच किमी पैदल चल कर और खेतों में छिपते हुए अयोध्या तक पहुंचे थे। वह पुलिस के पकड़े जाने से डर कर कई दिन तक एक घर में छिपे रहे। बाद में तीनों बिछड़ गए। कार सेवकों पर लाठी चार्ज और फायरिंग के दौरान दुकान एक महिला के घर शरण ली। हालात सामान्य होने पर दर्शन कर लौट आए। अब भगवान राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने पर खुशी से गदगद हैं।
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नगर के बस्ती मोहल्ला निवासी सुभाष चंद्र शर्मा, डॉ.अनित रस्तोगी व विनोद अग्रवाल उर्फ हीरा लाल अग्रवाल तीनों अच्छे मित्र हैं। 1990 में 15 अक्तूबर को अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के दर्शन और कार सेवा के लिए तीनों दोस्त गजरौला से रवाना हुए। मुरादाबाद से लखनऊ तक ट्रेन से पहुंचे। रास्ते में ट्रेन में सघन चेकिंग चल रही थी। इसलिए लखनऊ में उतर गए। यहां से कई घंटों तक बस का इंतजार करते रहे। कोई भी चालक बैठाने के लिए तैयार नहीं हुआ। बाद में एक चालक ने इस शर्त पर बैठाए कि वह अयोध्या से पहले रास्ते किनारे किसी गांव में उतार देगा। उसने अयोध्या से पहले रास्ते में उतार दिए। पुलिस का सख्त पहरा होने के कारण वह रात भर उसी गांव में किसी राम निवास नाम के शख्स के घर ठहरे। यहां कई दिन तक ठहरने के बाद कच्चे रास्ते और खेतों से गुजरते हुए अयोध्या पहुंचे तो तीनों को पुलिस ने पकड़ लिया, लेकिन हीरा लाल अग्रवाल व डॉ.अनित रस्तोगी पुलिस से हाथ छुड़ाकर भाग गए। जबकि सुभाष चंद्र शर्मा छूट कर भागने में नाकाम रहे। बाद में सुभाष चंद्र शर्मा को बिना किसी कार्रवाई छोड़ दिया गया। इस तरह डॉ.अनित रस्तोगी व हीरा लाल एक साथ और सुभाष चंद्र शर्मा अकेले रह गए। उधर अयोध्या में हालात बिगड़ गए। पुलिस और पीएसी ने कार सेवकों पर लाठीचार्ज के बाद फायरिंग शुरू कर दी। जिसमें डॉ.अनित रस्तोगी व हीरा लाल अग्रवाल के सामने दिल्ली का एक सेवानिवृत्त फौजी घायल हो गया था। लेकिन वह दोनों पुलिस की लाठीचार्ज या फायरिंग से बच गए थे। इस बीच सुभाष चंद्र शर्मा हनुमान गढ़ी चौराहा पर एक दुकान में छिपे रहे, जबकि डॉ.अनित रस्तोगी व हीरा लाल को एक महिला ने अपने घर में शरण दी। इधर कई दिन बाद हालात सामान्य होने पर प्रशासन ने राम लला के दर्शन की अनुमति दी। सुभाष चंद्र शर्मा पांच नवंबर 1992 को दर्शन कर अयोध्या से लौट आए। अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने पर खुशी से गदगद हैं। कहते हैं कि उनके सामने भगवान राम का भव्य मंदिर बन रहा है, यह बड़े सौभाग्य की बात है।
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कारोबार के दौरान हुए अयोध्या के दर्शन
गजरौला। नगर के स्टेशन रोड निवासी दिनेश अग्रवाल विहिप के पदाधिकारी हैं। उनका कहना है कि उनका गुड़ का कारोबार था। जिसके लिए उनका अयोध्या, हरदोई आदि को जाना होता था। वह 1988 और 1990 में अयोध्या गए थे। उस समय राम लला कोठरी में बंद थे। जिसे देख उनका मन बहुत दुखी हुआ। उनको यह उम्मीद नहीं थी कि अयोध्या में कभी भव्य मंदिर बन सकता है।
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