जिले की बदहाल बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने की कवायद रफ्तार नहीं पकड़ रही है। सात माह बाद भी जर्जर लाइन और खंभों को बदलने का काम सिर्फ 50 प्रतिशत ही पूरा हो सका है। ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि का काम भी अधूरा ही है। जबकि, गर्मी और बरसात के मौसम बीत चुके हैं और सर्दी शुरू होने को है। हालांकि, काम पूरा करने की अवधि दिसंबर तय की गई है।
मार्च माह में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए रिवैंप योजना के तहत 116 करोड़ का बजट मिला था। इसके तहत पुरानी और जर्जर लाइन तथा खंभों काे बदला जाना था। बिजली उपकेंद्रों की संख्या और क्षमता वृद्धि पर कार्य होना था। योजना के तहत 224 नए फीडर बनने के अलावा 33 केवीए और 11 हजार वोल्टेज की जर्जर लाइनों को बदला जाना था। 208 नए ट्रांसफार्मर बदलने के साथ 291 किमी एबी केबल बिछाया जाना था। यह कार्य गर्मी के मौसम में ओवरलोड से निजात दिलाने के लिए किए जाने थे। कार्य को पूरा करने के लिए दिसंबर माह का समय निर्धारित है। लेकिन, अभी तक 50 प्रतिशत कार्य ही हो सका है। अधीक्षण अभियंता सुनील कुमार कहना है कि अब तक 50 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। यह कार्य इसी साल में 31 दिसंबर तक पूरा करने का प्रयास किए जाएगा।
ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य भी अधूरा
ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि पर भी विभाग को पूरा जोर रहा। इसके तहत दस केवीए 25 केवीए, 25 केवीए के 63 केवीए बदलने जाने हैं। जबकि, 63 केवीए से 100 केवीए, 100 केवीए से 250 केवीए करने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, अभी 50 प्रतिशत ट्रांसफार्मर को भी नहीं बदला जा सका है।
224 में मात्र 170 फीडर ही बदले गए
ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांशत: देखा जाता है कि घरेलू व नलकूपों को एक ही फीडर से आपूर्ति दी जाती है। जिसके चलते ग्रामीणों को लो वोल्टेज व फाल्ट की समस्याओं से जूझना पड़ता है। घरेलू व नलकूपों को बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर बनाए जाने हैं, जो 224 हैं। लेकिन, अभी तक सिर्फ 170 फीडर ही बदले जा सके हैं।