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Amroha News: बगद नदी को पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायद शुरू

Tue, 14 May 2024 04:38 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। कभी अविरल रूप में बहकर खेतों को सींचने वाली बगद नदी का अस्तित्व धीरे-धीरे सिमटने लगा था। नदी की जगह खेत नजर आने लगे लेकिन अब प्रशासन की पहल पर इसके पुराने स्वरूप में लौटाने की कवायद शुरू हो गई है। दिन निकलते ही डीएम समेत तमाम अधिकारियों ने स्वयं फावड़ा चलाते हुए लोगों को नदी के पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए श्रमदान करने के लिए प्रेरित भी किया। नदी को जिले में 110 किलोमीटर तक कब्जामुक्त कराकर पुराने स्वरूप में लौटाया जाएगा।
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बिजनौर से निकलकर अमरोहा के धनौरा, हसनपुर और गंगेश्वरी होते हुए हुए संभल को को जाती है। कभी यह नदी जिले भर में 110 किलोमीटर की दूरी में बहती थी। समय के साथ-साथ नदी पर कब्जा होने लगा है। मौजूदा समय में नदी का स्वरूप ही गायब होने लगा है। फिलहाल नदी की जमीन पर कब्जे के बाद यह नाले का स्वरूप ले चुकी है। बगद नदी के जीर्णोद्धार को शासन स्तर से भी निर्देश जारी हुए। जिसके बाद डीएम राजेश त्यागी के नेतृत्व में सोमवार को गजरौला के शकूराबाद से पुनरोद्धार शुरूआत की गई। नदी की जमीन की पैमाइश कराकर उसको कब्जामुक्त कराया गया तथा मनरेगा के तहत नदी की खुदाई शुरू कराई गई।
जिसकी शुरुआत डीएम ने हवन एवं मंत्रोच्चार के बाद की। जिसके बाद मनरेगा के श्रमिकों की ओर से बगद नदी की खुदाई का काम शुरू किया गया। डीएम, सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा, परियोजना निदेशक अमरेंद्र प्रताप सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी आशीष कुमार सिंह एवं प्रशिक्षु एसडीएम/बीडीओ विकास मित्तल ने भी नदी की खुदाई में अपना श्रमदान किया। डीएम ने कहा कि नदी को पुराने स्वरूप में लौटाने के लिए राजस्व टीम की ओर से चिह्नांकन कर लिया गया है। कहा कि नदियों को जीवित रखना हम सबका कर्तव्य है। प्रयास रहेगा कि बगद नदी के साथ-साथ सोत एवं बान नदी को भी उसके पुराने स्वरूप में लौटाया जाए। कहा कि कब्जामुक्त होने के बाद नदी के किनारों पर फलदार व छायादार पौधे रोपे जाएंगे। किसानों को अपने खेतों पर जाने में परेशानी न हो, इसके लिए जहां-जहां आवश्यकता होगी, वहां पुल भी बनाए जाएंगे।
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शकूराबाद में बगद नदी के पुनरोद्धार की कवायद शुरू करने के लिए 126 बीघा जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। जमीन पर किसानों द्वारा कब्जा कर गन्ना एवं गेहूं की फसल को उगाया जा रहा था। राजस्व विभाग ने कब्जायुक्त जमीन का चिह्नीकरण कर उसको कब्जा मुक्त कराया, जिसके बाद अभियान की शुरुआत की गई।

बगद नदी जिले में 39 गांवों से होकर गुजरती है। जिसमें गजरौला के दस गांव एवं एक नगरीय क्षेत्र, हसनपुर के सात गांव व गंगेश्वरी के 21 गांव शामिल हैं। जिसकी कुल लंबाई करीब 110 किलोमीटर है। जिस पर गजरौला के रहमापुर माफी, सगरथली व खाईखेड़ा खादर में नदी की जमीन पर गेहूं एवं गन्ने की फसल उगाई जा रही थी। इसके अलावा शहबाजपुर डोर, तिगरिया खादर, सुल्तानठेर एवं बाटूपुरा में नदी की चौड़ाई कुल चार से पांच मीटर ही रह गई। वहीं हसनपुर के सात गांवों में बाढ़ खंड द्वारा कार्य तो कराया गया, लेकिन वर्तमान में वहां भी खेती की जा रही है। जबकि गंगेश्वरी ब्लॉक के रूखालू में तो नदी नाले का स्वरूप ले चुकी है। वहीं जयतौली में नदी की पूरी जमीन पर गन्ना एवं गेहूं की खेती की जा रही है। इसके अलावा मुबारिजपुर कलां, गुरेठा, उकावली, चचौरा व तरौली में नदी की पूरी जमीन पर कब्जा कर खेती की जा रही है। वहीं, जीतबापुर मुस्तकम में तो नदी का स्वरूप की गायब हो चुका है। इसके अलावा कई गांवों में नदी की जमीन पर कब्जा कर लिया गया। अब डीएम के निर्देश पर नदी की जमीन को कब्जामुक्त कराते हुए उसको पुराने स्वरूप में वापस लाने की कवायद की जाएगी। सभी जगहों पर राजस्व विभाग की टीम द्वारा चिह्नीकरण का काम शुरू किया जा रहा है।
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