अमरोहा। कबाड़ी के रिश्तेदार के घर में बड़ी संख्या में प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे की किताबें बरामद होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों में खलबली मची हुई है। डीएम की फटकार के बाद विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। देर रात तक मामले की जांच पड़ताल की। अधिकारियों का दावा है कि घर से बरामद हुई किताबें नहीं है वह कार्य पुस्तिकाएं (वर्कबुक) हैं। ये किताबें चंदनपुर बीआरसी केंद्र से डीसीएम में भरी गई थीं। विभाग के अधिकारियों द्वारा ये भी दावा किया गया कि डीसीएम के टायर में पंचर होने के कारण किताबों को घर में रखवाया गया था। फिलहाल पूरे मामले की जांच की जा रही है।
1266 परिषदीय विद्यालयों हैं। जिसमें 1 लाख 44 हजार विद्यार्थी हैं। शैक्षिक सत्र 2021-23 के शुरू होने के करीब पांच महीने बाद भी परिषदीय स्कूलों में बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी थी। विद्यार्थी बिना किताबों के स्कूल आ रहे थे। तमाम प्रयासों के बाद अगस्त 2022 के बाद किताबें अमरोहा पहुंची थीं। इसके बाद किताबें आती रहीं और विभाग के अधिकारी उन्हें स्कूलों में बांटने का दावा करते रहे। बीएसए कार्यालय में तैनात प्रशांत कुमार ने बताया कि इस सत्र में सभी 10 लाख से किताबें स्कूलों में बांट दी गई थीं, लेकिन बच्चों की कार्य पुस्तिकाएं देर से मिलने के कारण उन्हें बीआरसी केंद्रों पर रखवाया गया था। अधिकांश कार्य पुस्तिकाओं का भी वितरण किया जा चुका है। लेकिन गंगेश्वरी ब्लाक क्षेत्र के बीआरसी केंद्र चंदनपुर से कुछ स्कूलों में कार्य पुस्तिकाओं का वितरण होना बाकी थी। उन्होंने बताया कि कनेटा गांव में घर से बरामद किताबें बीआरसी केंद्र चंदनपुर की हैं। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों का केवल कार्य पुस्तिकाएं होने का तर्क गले नहीं उतर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ढेर में किताबें और वर्कबुक दोनों हैं।