डॉक्टर का तबादला, 200 मरीजों का ऑपरेशन लटका
अमरोहा। जिला अस्पताल में तैनात एकमात्र नेत्र सर्जन का तबादला हापुड़ हो गया है। उन्हें शुक्रवार को रिलीव कर दिया गया है। ऐसे में 200 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन लटक गया है। ओपीडी और ऑपरेशन कक्ष में ताला बंद होने से आंखों के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय में शासन से डॉक्टरों के 52 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 20 चिकित्सकों के सहारे स्वास्थ्य सेवाएं जैसे-तैसे रेंग रही है। जिला अस्पताल प्रशासन साल में चार-चार बार चिकित्सकों की कमी पूरी करने की डिमांड शासन को भेजता रहा है, लेकिन हर बार नतीजा सिफर ही निकलकर सामने आता है। आलम ये है कि जिला अस्पताल में ने तो कार्डियोलॉजिस्ट है और न चेस्ट फिजिशियन तैनात हैं। इतना ही नहीं अस्पताल में छह महिला चिकित्सकों समेत 32 पद खाली पड़े हैं। ऐसे में दिल और सीने की बीमारी के मरीजों को रेफर किया जाता है। दिल, बीपी और शुगर के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब बात नेत्र सर्जन की करें तो जिला अस्पताल में डॉक्टर टीपी सिंह तैनात थे। जिला पिछले दिनों शासन से हुए तबादलों में उनका ट्रांसफर हापुड़ जनपद के लिए हो गया था, लेकिन डॉक्टरों की कम के चलते उन्हे रिलीव नहीं किया गया था। लेकिन दबाव के चलते दो दिन पहले सीएमएस डॉ. प्रेमा पंत त्रिपाठी ने उन्हें रिलीव कर दिया। लेकिन डॉक्टर के रिलीव होने के बाद दो सौ से अधिक मरीजों का ऑपरेशन लटक गया है। डॉक्टर ने मरीजों को दिसंबर और जनवरी माह तक की तारीख दे रखी थीं। इतना ही नहीं डॉक्टर टीपी सिंह ओपीडी में रोजाना 30 से 35 आंखों के मरीजों को देखते थे। उनके जाने के बाद मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति
फिजीशियन के 2 पद हैं, जबकि एक डॉक्टर तैनात है। चेस्ट फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट के एक-एक पदों पर आज तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी। बाल रोग विशेषज्ञ दोनों पद भरे हैं। एनेस्थीसिया के 2 पदों पर एक डॉक्टर तैनात है। जनरल सर्जन के दो पद में से एक डॉक्टर की तैनाती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन के दोनों पद भरे हुए हैं। ऐसे ही नेत्र सर्जन के दोनों पद खाली हैं। जबकि ईएनटी सर्जन के एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। रेडियोलॉजिस्ट के 2 पदों में एक ही डॉक्टर हैं, जबकि 1 पद खाली है। चर्म रोग विशेषज्ञ में स्वीकृत एक पद पर डॉक्टर तैनात हैं। ईएमओ के तीनों पर भरे हुए हैं, अधीक्षक परामर्शदाता का एक पद है, वह भी खाली है। जबकि मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तैनात हैं।
क्या बोले मरीज
उझारी गांव के रहने वाले सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सरकारी अस्पताल में आंख दिखाई थी, जिसमें डॉक्टर ने आंख बनाने की सात दिसंबर की तारीख दी है, लेकिन हमें पता चला कि डॉक्टर का यहां से तबादला हो गया है। ऐसे में इलाज कराना बहुत मुश्किल हो रहा है। प्राइवेट डॉक्टर अत्यधिक रुपये की मांग कर रहे हैं। इतना पैसा मेरे पास नहीं है।
पूरनपुर गांव के रहने वाले गोविंद सिंह का कहना है कि 15 तारीख को मेरा ऑपरेशन होना है। मुझे पता चला है कि डॉक्टर ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं। उनका स्थानांतरण हो गया है। आंखों की सारी जांच भी हो चुकी हैं। ऑपरेशन की पंद्रह तारीख मिली है, अब समझ नहीं आ रहा क्या करें। कोई डॉक्टर जल्द आएगा ये उम्मीद नहीं हैं।
डिडौली गांव की रहने वाली सुशीला देवी की आंखों का ऑपरेशन 7 दिसंबर को होना था। उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। पिछले दो दो महीने से चक्कर काट रही थीं। बड़ी मुश्किल में ऑपरेशन की तिथि मिली थी। अब डॉक्टर नहीं है, प्राइवेट अस्पताल के लिए रुपये का अभाव है। ऐसे में क्या करें समझ नहीं आ रहा है।
काफी समय नेत्र सर्जन का हापुड़ के लिए तबादला हो गया था। लिहाजा उन्हें रिलीव कर दिया गया है। अब जिला अस्पताल में नेत्र सर्जन नहीं हैं। ऐसे मरीजों को परेशान होना स्वाभाविक है। शासन को पत्र लिखकर नेत्र सर्जन की मांग की गई है। देखते हैं कब तक कोई डॉक्टर मिलता है।- डॉ प्रेमा पंत त्रिपाठी, सीएमएस