अमरोहा। अनुसूचित जाति की साढ़े तेरह वर्षीय बेटी को सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को सजा दिलाने में पुलिस की 57 पेज की चार्जशीट और फोरेंसिक रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई। पीड़िता के बयानों ने भी मजबूती दी। यही वजह रही की 73 दिन में न्यायालय ने करीब 15 बार मुकदमे में सुनवाई की। पुलिस और अभियोजन की सशक्त पैरवी के चलते आखिरी 60 मिनट में बेटी को इंसाफ और दोषियों को सजा मिली।
इतना ही नहीं न्यायालय ने बहस सुनने के बाद दोषी पक्ष के तर्क को बलहीन माना है। वहीं, बेटी को न्याय मिलते ही पीड़िता के माता-पिता भावुक हो गए। उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। कोर्ट में हाथ जोड़कर खड़े हो गए और पुलिस व न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। विशेष लोक अभियोजक रतनलाल लोधी ने बताया कि घटना 27 अप्रैल 2024 की रात को हुई थी। जबकि किशोरी के पिता ने 28 अप्रैल आरोपी नूर मोहम्मद के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मामला अनुसूचित जाति से जुड़ा था, इसलिए सीओ अंजलि कटारिया ने मुकदमे की विवेचना की। पीड़िता का मेडिकल कराया गया।
प्रकरण में फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए थे। जिसकी रिपोर्ट में दोषी दिलशाद, मुन्तजिम और राशिद के द्वारा दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इस पूरे मामले में छह गवाहों ने न्यायालय के सामने अपनी गवाही दी। जिसमें पीड़िता, उसके पिता, मेडिकल करने वाली डॉक्टर, विवेचक, एफआईआर लेखक और स्कूल प्रधानाचार्य शामिल रहे। सीओ अंजलि कटारिया ने करीब 35 दिन के भीतर विवेचना पूरी कर 2 जून 2024 को मजबूत साक्ष्यों के साथ 57 पेज का आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। जिसके बाद 10 जून 2024 को न्यायालय ने मुकदमे को संज्ञान में लेकर पहली सुनवाई की। पहली से लेकर आखिरी सुनवाई तक 73 दिन में न्यायालय ने 15 तारीखों में आरोपी और पीड़ित पक्ष को सुना। आखिरी दिन यानी बुधवार को मुकदमे में दो घंटे तक बहस चली। इस दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद दोषी पक्ष के तर्क को बलहीन माना और आखिरी क्षणों में बेटी को इन्साफ व दोषियों को सजा सुना दी।
नूर मोहम्मद को नाबालिग घोषित करने की अपील भी हुई खारिज
विशेष लोक अभियोजक रतनलाल लोधी ने बताया कि घटना का मुख्य आरोपी नूर मोहम्मद की मां शायमा ने उसे नाबालिग घोषित करने के लिए किशोर न्यायालय बोर्ड में प्रार्थना पत्र दिया था। लेकिन न्यायालय ने मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर नूर हसन को 19 साल का माना। दोषी बेटों को बचाने के लिए परिजनों की जद्दोजहद नाकाम साबित हुई।
सीओ अंजलि की पहली विवेचना में बेटी को मिला त्वरित इन्साफ
अमरोहा। सीओ अंजलि कटारिया दिसंबर 2022 में अमरोहा में अंडर ट्रेनिंग आईं थीं। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सितंबर 2023 में उन्हें नौगांवा सादात सर्किल का क्षेत्राधिकार बनाया गया। 27 अप्रैल 2024 को अनुसूचित जाति की बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। जिसकी विवेचना सीओ अंजलि कटारिया ने की। अंजलि कटारिया की ये पहली विवेचना थी, जिसमें महिला अपराध से जुड़े मामले में बेटी को त्वरित इन्साफ मिला। सीओ अंजलि कटारिया ने विवेचना को 35 दिन के भीतर विवेचना पूरी करके न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। उन्होंने घटना से जुड़े साक्ष्यों को बेहतर ढंग से अपनी विवेचना में शामिल किया। बेहतर विवेचना के चलते बेटी को इंसाफ मिला और दोषियों को सजा। सीओ अंजलि कटारिया ने बताया कि घटना दो वर्गों से जुड़ी थी, जबकि पीड़िता अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखती है। घटना बेहद दुखद थी। मैं खुद भी बेटी हूं, घटना को समझा और जल्दी-जल्दी साक्ष्य इकट्ठा करके दोषियों को सजा दिलाने में कामयाबी हासिल की।