फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: करोड़ों रुपये खर्च फिर भी प्लेटलेट्स के लिए मेरठ- मुरादाबाद, दिल्ली की दौड़ लगाने को मजबूर मरीज-तीमारदार

विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। जनपद में डेंगू और बुखार जान लील रहा है। अब तक 23 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। अधिकांश मरीजों की प्लेटलेट्स गिर रही हैं, लेकिन जिला अस्पताल करोड़ों रुपये खर्च कर स्थापित की गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट बेकार साबित हो रही है। लाइसेंस के इंतजार में इस साल भी यूनिट चालू नहीं हो सकी। मरीज और तीमारदारों को प्लेटलेट्स के लिए मेरठ- मुरादाबाद और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ रही है।
विज्ञापन

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इंजीनियरों ने मशीनों में सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर दिए हैं। ब्लड बैंक कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। ताकि मरीजों को अमरोहा में ही प्लेटलेट्स मिल सके। इसके बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। दरअसल जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए सरकार ने ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया था। शासन से मंजूरी मिलने के बाद पहले बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी पूरा हुआ। सभी मशीनें लग चुकी हैं। उम्मीद थी कि इस साल से खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे।
जिससे एक यूनिट खून से चार अलग-अलग मरीजों की जान बचाई जा सके। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। यूनिट की लाइसेंस प्रक्रिया चल रही है। यूनिट के चालू नहीं होने के कारण गंभीर बीमार मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं मिल पा रही हैं। तीमारदार मरीजों को लेकर मेरठ- मुरादाबाद और दिल्ली की दौड़ लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन



जंबो पैक के नाम पर मची लूट
जिले में बेकाबू हो रहे डेंगू मलेरिया के मरीजों को इलाज देने में भी सरकारी अस्पताल पूरी तरह सफल नहीं हो रहे हैं। मरीजों की जान बचाने के लिए प्लेटलेट्स का इंतजाम करने को तीमारदार भागदौड़ कर रहे हैं। लेकिन जिले में उन्हें प्लेटलेट्स नहीं मिल रहा है। वहीं जंबो पैक के नाम पर मेरठ-दिल्ली और मुरादाबाद में निजी अस्पताल में लूट मची है। उनसे 25-40 हजार रुपये प्रति जंबो पैक का वसूला जा रहा है।

यूनिट पूरी तरह तैयार है। फिलहाल लाइसेंस की प्रक्रिया चल ही है। लाइसेंस मिलते ही यूनिट को चालू कर दिया जाएगा। जिसके बाद यहीं पर मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी और क्रॉयोप्रेसीपिटेट मिल सकेंगे।
विज्ञापन

-डॉ. प्रमोद कुमार, प्रभारी, ब्लड बैंक जिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें