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Amroha News: पुलिस मुठभेड़ को कोर्ट ने माना संदिग्ध, बोली-गोली चलाई तो खोखे कहां गए

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अमरोहा। बाइक चोरी के आरोपियों के साथ सोमवार की रात हुई हसनपुर पुलिस की मुठभेड़ को न्यायालय ने संदिग्ध और अविश्वसनीय माना है। इतना ही नहीं न्यायालय ने रिमांड को निरस्त करते हुए जानलेवा हमले के आरोप से तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। वहीं, पुलिस की गोली लगने से घायल एक आरोपी को न्यायालय ने केवल आर्म्स एक्ट में जेल भेजा है। न्यायालय ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। न्यायालय ने यह टिप्पणी उस समय की जब मुकदमे के विवेचक ओमवीर सिंह यादव ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया था।
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चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल देवेंद्र पाल व सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल वसीम अहमद ने बताया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ओमपाल सिंह ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह विचित्र, आश्चर्यजनक एवं अस्वाभाविक है कि किसी पुलिस कर्मचारियों को कोई चोट नहीं लगी। यह भी संदिग्ध और अविश्वसनीय है कि कथित घटना स्थल पर पुलिस द्वारा चलाए गए 9 एमएम के दो खोखे काफी तलाशने के बाद भी नहीं मिले। घायल आरोपी मनोज कुमार के बाएं पैर में पुलिस की एक गोली लगी है, यह गंभीर जांच का विषय है कि दूसरी गोली कहां गई। दोनों गोलियों के खोखे कहां गए। आरोपी के खोखे का कारतूस तो पुलिस ने बरामद किए हैं, लेकिन पुलिस अपने खोखे बरामद नहीं कर सकी।
जिससे इस घटना की प्रमाणिकता संदिग्ध है। केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि मौके पर केवल मनोज कुमार को पकड़ा गया, जबकि दो आरोपियों को गजरौला तिराहा हसनपुर से गिरफ्तार किया गया है। जिनसे कोई बरामदगी नहीं है। इतना ही नहीं पुलिस टीम में केवल चार लोग थे, जबकि आरोपियों की संख्या तीन दर्शाई गई है। इस मुठभेड़ में किसी भी पुलिसकर्मी को खरोंच तक नहीं आई। ऐसी स्थिति में तथ्यों व परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए तीनों आरोपियों पर जानलेवा हमला करने का अपराध बनना स्पष्ट नहीं है।
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मामले को गंभीरता से लेकर न्यायालय ने तीनों आरोपियों का रिमांड को निरस्त कर दिया। साथ ही जानलेवा हमला करने के आरोप से आरोपी मनोज सैनी, रोहित और अनिल को बरी कर दिया। वहीं, पुलिस ने आरोपी मनोज सैनी से तमंचा व कारतूस बरामद दिखाए हैं, इसलिए कोर्ट ने मनोज सैनी को आर्म्स एक्ट के आरोप में जेल भेज दिया है।

अधिवक्ताओं ने पुलिस को इन सवालों से घेरा
- पुलिस टीम ने एफआईआर में थाने से रवानगी का समय तो दर्शाया है, लेकिन घटना का समय व आरोपियों की गिरफ्तारी के समय का उल्लेख केस डायरी में नहीं किया है।

- सोमवार की रात साढ़े ग्यारह बजे की मुठभेड़ दिखाई गई है, जिसमें पुलिस द्वारा सटीक निशाना लगाकर आरोपी के पैर में गोली मारी है, जबकि आरोपी के द्वारा चलाई गई गोली से एक भी पुलिस कर्मी जख्मी नहीं हुआ है।

- पुलिस के गिरफ्तारी मेमो के कॉलम अपूर्ण हैं, जबकि सभी कॉलम पूर्ण होने चाहिए थे।

- मुठभेड़ में घायल आरोपी मनोज के परिजनों को पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी की सूचना नहीं दी।

- पुलिस की ओर से चलाई गईं गोलियाें से खोखे बरामद नहीं हुए हैं। जबकि आरोपी की गोली के खोखे बरामद दिखाए गए हैं।

- नए कानून के तहत सात साल या उससे अधिक सजा के मामले में विशेषज्ञों को घटनास्थल पर बुलाने का प्रावधान है, जिसका पालन पुलिस ने नहीं किया।
- पुलिस तीनों को रात में उनके घर से उठा कर लाई थी, इसके बाद मुठभेड़ दिखाई गई।
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- अदालत ने हसनपुर पुलिस की मुठभेड़ को संदिग्ध और अविश्वसनीय माना है। जिसके आधार पर आरोपी मनोज सैनी, राहुल व अनिल को पुलिस पर जानलेवा हमले के आरोप से मुक्त कर दिया है। न्यायालय ने मनोज सैनी के लिए आर्म्स एक्ट में रिमांड स्वीकार किया है।
-वसीम अहमद, सहायक लीगल एड डिफेंस काउंसिल

मुठभेड़ में आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली टीम
जिस मुठभेड़ को न्यायालय ने संदिग्ध और अविश्वसनीय माना है, उसमें इंस्पेक्टर सनोज प्रताप सिंह, एसएसआई विनोद कुमार गोले, एसआई मनोज कुमार, एसआई मोइन अली, एसआई प्रविंद्र कुमार, सिपाही कमल, दीपक, गौरव तौमर, टिंकू व रोहित शामिल रहे। जबकि एसओजी/सर्विलांस टीम से प्रभारी बिजेन्द्र मलिक, सिपाही गौरव शर्मा, सिपाही वाजिद अली, प्रवेश कुमार बर्मन रहे थे।
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