गजरौला। मास्टर प्लान से पूर्व बने मकानों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अवैध बताकर एमडीए की तरफ से नोटिस दिए जाने पर कॉलोनाइजर व प्लॉट मालिकों में आक्रोश पनप रहा है। उन्होंने एई को ज्ञापन सौंप कर कहा कि मास्टर प्लान चार महीने पूर्व लागू हुआ, जबकि नगर और उसके चारों तरफ दशकाें से हजारों मकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान बन गए। जिनके नक्शे पास न होने की बात कह एमडीए नोटिस जारी कर परेशान कर रहा है।
मंगलवार दोपहर कॉलोनाइजर व प्लॉट मालिक एकत्र होकर नगर की एमडीए कॉलोनी स्थित एमडीए कार्यालय में गए। यहां पर उन्होंने मांगों का ज्ञापन एई केएन जगूड़ी को सौंपा। कहा कि मास्टर प्लान मार्च में लागू हुआ, जबकि गजरौला में दशकों से अनेक कॉलोनियां बस रही हैं। हजारों लोगों ने कॉलोनियों में अपना घर बनाने के लिए प्लॉट खरीद लिए हैं। सिर ढकने के लिए घर बनाने की तैयारी कर रहे हैं। सैकड़ों लोगों ने अपने घर बना लिए हैं, मगर एमडीए के अफसर कॉलोनियों को अवैध बता रहे हैं। उनमें जो लोग अपना घर बनाना चाहते हैं, उनका नक्शा पास नहीं किया जा रहा है।
मांग रखी कि नई कॉलोनी भले ही न बसाने दी जाए, मगर जो कॉलोनी कट गई हैं, उनमें मकान बनाने के नियमों को सरल किया जाए। एमडीए से नक्शा पास कराए जाएं। अवैध बताकर एमडीए ने परेशान करना बंद नहीं किया तो कॉलोनाइजर प्लॉट मालिकों व जनता के साथ मिलकर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। इस मौके पर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन वेदपाल सिंह, चौधरी वीरेंद्र सिंह, सोमवीर सिंह, ब्रजपाल सिंह, दीपक चौधरी, सुरेंद्र औलख, नवीन गर्ग, गोपाल अग्रवाल, अरविंद वर्मा आदि मौजूद रहे।
-
जरूरत पड़ी तो लखनऊ भी जाएंगे
गजरौला। कॉलोनाइजर व प्लॉट मालिकों ने एई को सौंपे ज्ञापन में कहा कि एमडीए ने अब तक दस हजार लोगों को नोटिस दे दिया है। जिससे लोग तनाव में जी रहे हैं। उनको डर सता रहा है कि पता नहीं कब उनके बने बनाए आशियाने को ध्वस्त कर दिया जाए। कहा कि एमडीए की कार्रवाई के कारण कई लोगों को हार्ट अटैक हो चुका है। कड़े शब्दों में कहा कि वह उत्पीड़न नहीं होने देंगे। जरूरत पड़ी तो लखनऊ में जाकर जनता की आवाज उठाई जाएगी।