कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले ऐतिहासिक तिगरी धाम मेले की तैयारियां शुरू हो गई है। इस बार गंगा की तलहटी पर करीब पांच किलो मीटर में तंबुओं की नगरी सजेगी। शासन ने मेले के लिए सवा करोड़ रुपये का बजट मिल गया है।
कार्तिक पूर्णिमा को गंगा में लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। जिसके चलते गंगा किनारे तंबुओं का शहर बस जाता है। इस बार जबकि मुख्य स्नान आठ नवंबर को है। यूं तो अभी मेले में महीने भर का वक्त है, लेकिन जिला पंचायत ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
डीएम बीके त्रिपाठी और एसपी आदित्य लांग्हे ने अधीनस्थों के साथ तीन बार मेला स्थल का मुआयना कर चुके हैं। मेला आयोजन को गंगा किनारे जमीन का मुआयना किया। यह देखा गया कि मेला लगाने के लिए कौन की जगह उपयुक्त रहेगी। यह भी रूपरेखा तैयार की गई है कि मेले में जाने के लिए मुख्य मार्ग के अलावा एक वीआईपी मार्ग भी बनाया जाएगा। जिससे आपात स्थिति या जाम लगने पर दूसरे रास्ते से पहुंचा जा सके। इस बार करीब पांच किलोमीटर ऐरिया में तंबुओं की नगरी सजेगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी विभाग ने जमीन को चिह्नित कर लिया है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी हरमिक सिंह ने बताया कि मेले में श्रद्धालुओं की सहूलियतों को ध्यान रखा जाएगा।
ऐतिहासिक तिगरी मेले की निगरानी तीन ड्रोन कैमरों से होगी। इसके अलावा बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। पूरी मेला सीसीटीवी कैमरों की जद में होगा। मेले का लाइव प्रसारण एलईडी स्क्रीन पर कराया जाएगा। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की कमान पुलिस के हाथों में रहेगी। इसके लिए मेेला कोतवाली में कंट्रोल रूम बनेगा।