अमरोहा। श्रीमद्दयानंद कन्या गुरुकुल चोटीपुरा में शुक्रवार को तीन दिवसीय वैदिक मानस योग कार्यशाला का समापन हो गया। समापन अवसर पर पतंजलि योग पीठ के अध्यक्ष व आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि दुनिया में अनेक शिक्षण संस्थान चल रहे हैं लेकिन इस संस्थान ने वैदिक परंपरा, मर्यादा एवं वैदिक शिक्षा के माध्यम से नारी शक्ति को संस्कारित करने का जो बीड़ा उठाया है, वह अपने आप में अद्वितीय है। उन्होंने छात्राओं को वैदिक परम्पराओं के बारे में विस्तार से बताया।
शुक्रवार को श्रीमद्दयानंद कन्या गुुरुकुल चोटीपुरा में तीन दिवसीय वैदिक मानस योग कार्यशाला का विधिवत समापन हो गया। समापन समारोह में आचार्य बाल कृष्ण व साध्वी ऋृतंभरा भी पहुंचे। आचार्य बाल कृष्ण ने कहा कि दुनिया में अनेक शिक्षण संस्थान चल रहे हैं, लेकिन यह संस्थान वैदिक परंपरा, मर्यादा एवं वैदिक शिक्षा के माध्यम से नारी शक्ति को संस्कारित करने का जो बीड़ा उठाया है, वह अपने आप में एक अद्वितीय है। आचार्य की भूमिका के साथ-साथ मातृवत कन्याओं का संरक्षण करने के कारण उन्होंने आचार्या डा. सुमेधा को आचार्या मां कहकर संबोधन किया। साध्वी मां ऋतम्भरा ने बालिकाओं को देश-धर्म हेतु समर्पित होने के लिए प्रेरित किया। कहा कि ऋषियों, महर्षियों की परम्परा को अपनाते हुए इस गुरुकुल ने देश में नई पहचान बनाई है। भारत की वैदिक परंपरा फिर से अवतरित होगी। प्राचार्या सुमेधा ने दोनों अतिथियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि साधन हमें नहीं बनाते हैं बल्कि साधना मनुष्य को गढ़ती है। प्रतिकूलताएं ही मनुष्य को मजबूत बनाती हैं। यह गुरुकुल इसी का साक्षात उदाहरण है। वहीं, इससे पूर्व आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षक अरविन्द राणा ने अपने सहयोगी प्रशिक्षकों डाॅ.उपासना अग्रवाल, शुभांगी श्रीवास्तव, डाॅ. प्रतिभा, कमल देव एवं महेंद्र गांधी के साथ बालिकाओं को आंखों पर पट्टी बांधकर रंग पहचानना, अक्षर पढ़ना, रंग के अनुसार घूमना आदि कलाओं की शिक्षा दी गई। तीन दिन चली कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हो गया।