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57 दिन में चार्ज शीट, 19 दिन में 17 घंटे सुनवाई से मिल गया बेटी को इंसाफ

सार

5 दुष्कर्म पीड़ित बेटी को त्वरित न्याय दिलाने पुलिस की ओर से दाखिल की गई 42 पेज के आरोप पत्र ने अहम भूमिका निभाई।विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह सैनी ने बताया कि 21 जून को आरोपी आदित्य वर्मा 15 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया था।साथ ही न्यायालय में मुकदमों की सशक्त पैरवी की जा रही है।
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विस्तार
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5 दुष्कर्म पीड़ित बेटी को त्वरित न्याय दिलाने पुलिस की ओर से दाखिल की गई 42 पेज के आरोप पत्र ने अहम भूमिका निभाई। बेटी भी अपने मजबूत इरादों के साथ डटी रही। पुलिस ने विवेचना कर 57 दिन में आरोप पत्र दाखिल किया। जिसके आधार पर न्यायालय ने 19 दिन में 17 घंटे सुनवाई की और आरोपी को सजा के मुकाम तक पहुंचाया। बेटियों को लगातार मिलते त्वरित न्याय को लेकर चारों तरफ पुलिस और न्यायालय प्रशंसा हो रही है।
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विशेष लोक अभियोजक बसंत सिंह सैनी ने बताया कि 21 जून को आरोपी आदित्य वर्मा 15 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर अपहरण कर ले गया था। उसने 10 दिन तक बंधक बनाकर दिल्ली के एक मकान में रखा था। इस मामले में अपहरण के 3 दिन बाद 24 मई 2022 को पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जबकि पुलिस ने आरोपी आदित्य वर्मा को 3 जून 2022 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तभी से वह जेल में बंद है, तमाम प्रयासों के बाद भी उसे जमानत नहीं मिल सकी थी। इस मामले में दरोगा पवन कुमार पाठक और इंस्पेक्टर अरिहंत कुमार सिद्धार्थ ने गहनता के साथ विवेचना की और 21 जुलाई 2022 को न्यायालय में 42 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद न्यायाधीश डॉ.कपिला राघव ने 13 सितंबर 2022 को मुकदमे में पहली सुनवाई की थी। चार्जशीट और बेटी के मजबूत इरादों को देखते हुए न्यायालय ने पहली ही सुनवाई के बाद मुकदमे को ट्रायल पर ले लिया था। इसके बाद एक अक्तूबर 2022 तक न्यायालय 19 दिन में 17 घंटे सुनवाई की। जिसमें न्यायालय ने अभियोजन और बचाव पक्ष को सुना था। जिसके बाद साक्ष्य और सबूतों के आधार पर बृहस्पतिवार को न्यायालय ने आरोपी आदित्य वर्मा को दोषी करार दिया।
लोक अभियोजक ने बताया कि न्यायालय ने इस पूरे मामले में पुलिस के आरोप पत्र के अलावा दोनों विवेचक, बेटी के मजबूत इरादे, पिता की मजबूत पैरवी, डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट और स्कूल के लिपिक द्वारा दिया गया उम्र सर्टिफिकेट के आधार पर आरोपी आदित्य वर्मा को दोषी माना और 20 साल की सजा सुनाई। साथ साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माने में से 30 हजार रुपये पीड़ित बेटी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
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अपराधियों को खुले में घूमने की आजादी नहीं है। इसके लिए अभियान चलाकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जा रही है। हार्डकोर क्रिमिनलों को जेल भेजा जा रहा है। साथ ही न्यायालय में मुकदमों की सशक्त पैरवी की जा रही है। बेटियों को त्वरित न्याय मिलना पुलिस की त्वरित कार्रवाई का नतीजा है। इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेंगी।-आदित्य लांग्हे, एसपी अमरोहा
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