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नगर पालिका अमरोहा के सीमा विस्तार पर लगी कैबिनेट की मुहर

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पचास साल बाद नगर पालिका परिषद के सीमा विस्तार कैबिनेट की मुहर लग गई है। इसके साथ ही नगर पालिका क्षेत्र में 45 गांव और शामिल हो गए हैं। इन ग्राम पंचायतों के 70 हजार मतदाता चेयरमैन चुनने में अपनी भूमिका निभाएंगे। परिसीमन में शामिल सभी गांवों में शहरी सुविधाएं मिलेंगी। इनमें ग्राम प्रधान नहीं बल्कि सभासद चुने जाएंगे। इन 45 गांव की बीस ग्राम पंचायतों के जुड़े ग्राम प्रधान सीमा विस्तार के विरोध में हैं। वह लगातार गांवों को नगर पालिका में शामिल नहीं करने की मांग कर रहे हैं।
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अमरोहा को 1880 में नगर पालिका परिषद का दर्जा मिला था और 1972 में पहली बार सीमा विस्तार हुआ था। जिसके बाद से शासन से सीमा विस्तार की मांग लंबे समय से चली आ रही थी। सियासी व अन्य कारणों से 50 साल में सीमा विस्तार नहीं हो सका था। पालिकाध्यक्ष बनने के बाद शशि जैन ने सीमा विस्तार के काफी प्रयास किए। जून 2018 को उन्होंने पालिका बोर्ड की बैठक में सीमा विस्तार का प्रस्ताव पास कराकर तत्कालीन डीएम हेमंत कुमार की संस्तुति कराकर शासन को भेजा था। लेकिन 19 सभासदों ने प्रस्ताव के विरोध में आ गए और उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने शासन स्तर से ही सीमा विस्तार की समस्या का हल करने के निर्देश दिए थे। पिछले दिनों शासन ने नया आदेश जारी कर सीमा विस्तार के प्रस्ताव के लिए बोर्ड की बैठक या फिर डीएम की संस्तुति में से किसी एक को पर्याप्त बताया था जिसके बाद तत्कालीन डीएम उमेश मिश्र ने प्रस्ताव पर अपनी संस्तुति जताते हुए शासन को पत्र भेजा था। नगर पालिका सीमा विस्तार के इस प्रस्ताव में 45 गांवों को शामिल किया गया था जिसे शासन ने मंजूरी दे दी थी। सीमा विस्तार पर केवल कैबिनेट की मुहर लगना बाकी थी। पिछले तीन बार से कैमेनट की बैठक स्थगित होने की वजह से नगर पालिका और नगर पंचायत के सीमा विस्तार पर मुहर नहीं लग सकी।
ईओ बृजेश सिंह ने बताया कि मंगलवार को कैबिनेट की बैठक प्रदेश की 20 नगर निकायों के सीमा विस्तार पर मुहल लग की गई है। इसमें अमरोहा नगर पालिका परिषद भी शामिल है। अब 20 ग्राम पंचायतों के 45 गांवों भी नगर पालिका परिषद अमरोहा के हिस्सा बन गए हैं। अब नगर नगर पालिका क्षेत्र में करीब 1.44 लाख मतदाता थे। इन ग्राम पंचायतों के शामिल होने के बाद 70 हजार मतदाता और बढ़ गए हैं। आने वाले निकाय चुनाव में लगभग 2.14 लाख वोटर मतदान करेंगे। इस सीमा विस्तार के बाद कई राजनीतिज्ञों के समीकरण बिगड़ गए हैं।
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खालकपुर खुर्द, कलाली, दुर्गपुर, मिलक महमदी, मोहनपुर जानिब जनूबी, अमरोहा देहात, गुलड़िया, अल्हेदादपुर खुर्द, मीरा सराय, सलेमपुर हेमनगर, हुसैनपुर निकट मालीखेड़ा, अली मोहम्मदपुर, मोहम्मदपुर नवादा, मसूदपुर, पंडकी, चक पंडकी, रायपुर खुर्द, रामपुर घना, दासीपुर, पचोकरा मेहरबान अली, उमरपुर, केशीपुर, ऐवजाबाद, पिलक सराय, नाजरपुर खुर्द, पट्टी रायपुर कलां, रायपुर कलां, उक्सी, अहोई, मिलक बिकनी, हाशमपुर, माहुबा, सादुल्लापुर, दाउदसराय, पंजू सराय, निमाजपुर गरवी, जलालपुर नारायन, फाजलपुर, रजाकपुर, मोहम्मदपुर भूड़, अकबरपुर पट्टी, मोहम्मदपुर जट्टी, फरीदपुर घोसी, मकनपुर कस्बा ययद, चकगढ़मला शामिल होंगे।
नगर पालिका परिषद अमरोहा में शामिल होने वाले 45 गांव से जुड़े 20 ग्राम पंचायतों के प्रधान सीमा विस्तार के विरोध में है। वह लगातार का विरोध कर रहे हैं। जिलाधिकारी से लेकर केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंप चुके हैं। मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा गया है। ग्राम प्रधानों का कहना है कि वह पंचायत राज अधिनियम 1947 के अंतर्गत निर्वाचित प्रधान हैं। पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत ग्राम प्रधान का कार्यकाल पांच साल का है। इसलिए निर्वाचित ग्राम प्रधानों का कार्यकाल वर्ष 2026 तक चलेगा। पिछले नगर पालिका परिषद अमरोहा सीमा विस्तार प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कराया जाए। साथ ही सीमा विस्तार के प्रस्ताव को जनहित और निर्वाचित ग्राम प्रधान के हित में रद्द किया जाए। विरोध के बीच सीमा विस्तार पर कैबिनेट की मुहर लगना ग्राम प्रधानों को बड़ा झटका है। ऐसे में ग्राम प्रधानों का विरोध उग्र हो सकता है।
शहर के नजदीक कई गांव ऐसे हैं, जो आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उनमें सड़कें नहीं हैं, पेयजल की व्यवस्था नहीं है। जो हैडपंप लगे हैं, उनमें पानी नहीं आता। एक बार खराब हो जाएं तो दोबारा उनकी मरम्मत नहीं होती। सड़कें टूटी पड़ी हैं। बीच सड़क से पानी बह रहा है। नाले नालियां साबित नहीं हैं। नगरपालिका में आने के बाद इन्हें शहरी सुविधाएं मिल सकेंगी।
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