हसनपुर(अमरोहा)। रद्दी में दस हजार से अधिक किताबों बेचने के मामले में निलंबित शिक्षा विभाग के कर्मचारी जयपाल और कबाड़ी सरफराज समेत तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया है।सीओ अभिषेक कुमार यादव ने प्रेसवार्ता कर खुलासा किया कि बीआरसी चंदनपुर में तैनात कर्मचारी द्वारा कार्य पुस्तिकाएं रद्दी में कबाड़ी सरफराज को बेचीं गईं, जिन्हें सप्लायर संदीप राणा के माध्यम से कबाड़ी तक पहुंचाया गया था। नामजद अन्य दो आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
सात फरवरी को हसनपुर क्षेत्र के शाहपुर कला निवासी कबाड़ी सरफराज के ससुर गांव कनेटा निवासी फारूख के घर से दस हजार से अधिक कार्य-पुस्तिकाएं बरामद की गई थीं। सामने आया था कि कार्य-पुस्तिकाओं को बीआरसी चंदनपुर से विद्यालयों में बांटने के बजाय रद्दी में बेचा था। इस प्रकरण में खंड शिक्षा अधिकारी गंगेश्वरी आयशा बी की तहरीर पर सैदनगली थाने में कबाड़ी के ससुर फारूख व किताबों के सप्लायर बालाजी एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर राजू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।
रविवार को डीएम बीके त्रिपाठी ने सैदनगली पहुंचकर कबाड़ी सरफराज को बुलाकर पूछताछ की थी। सच्चाई सामने आने पर बीआरसी चंदनपुर पर किताबों के भंडारण और वितरण का लेखा जोखा रखने वाले कर्मचारी जयपाल सिंह निवासी मोहल्ला होलीवाला कस्बा हसनपुर और सतेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया था।
मंगलवार को प्रेसवार्ता करते हुए सीओ अभिषेक कुमार यादव ने बताया कि जांच पड़ताल में दोषी पाए जाने पर कबाड़ी सरफराज, किताबों के सप्लायर संदीप राणा निवासी मोहम्मदपुर सुल्तानठेर थाना गजरौला व शिक्षा विभाग के कर्मचारी जयपाल को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। तीनों का नाम विवेचना में बढ़ाया गया है। इनके खिलाफ धारा 409/411/34 के तहत कार्रवाई की गई है, हालांकि बालाजी एंटरप्राइजेज का प्रोपराइटर राजू अभी फरार हैं। फरार आरोपियों जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
कर्मचारी बोला, बड़े अधिकारी और दूसरे कर्मचारी को कार्रवाई से क्यों बचाया
सीओ कार्यालय में खुलासे के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने शिक्षा विभाग के कर्मचारी जयपाल से पूछताछ की तो जयपाल ने बताया कि केवल मेरे खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है, जबकि शिक्षा विभाग के अधिकारी व दूसरे कर्मचारी को कार्रवाई से क्यों बचाया जा रहा है। जितना मैं कसूरवार हूं उतना ही दूसरे कर्मचारी व अधिकारी कसूरवार हैं। सात फरवरी को रद्दी में पकड़ी गईं किताबों के बाद आठ फरवरी को मुझे स्टोर का प्रभारी बनाकर कागजों में दर्शाया गया है। मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जो भी दोषी हैं सभी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
डीएम के आदेश से एक दिन पूर्व ही बीएसए ने निलंबित कर दिए थे कर्मचारी
शिक्षा विभाग में अंदरखाने क्या-क्या चल रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि डीएम के आदेश के बाद जो कर्मचारी निलंबित किए जाने थे। उन्हें एक दिन पूर्व ही कार्यालय का अवकाश पर रहने पर निलंबित भी कर दिया गया। इसका पता तब चला जब रविवार को डीएम बीके त्रिपाठी ने सैदनगली थाने में मीडिया कर्मियों को बयान देते हुए कहा था कि मामले में कबाड़ी से पूछताछ के बाद दोषी पाए जाने पर बीआरसी चंदनपुर पर तैनात दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन कुछ देर बाद जब बीएसए कार्यालय से निलंबन की कार्रवाई का पत्र जारी हुआ तो पत्र जारी होने की तिथि 11 फरवरी लिखी हुई थी। यानि डीएम ने 12 फरवरी को आदेश किया और कार्रवाई एक दिन पहले ही हो चुकी थी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी गिर सकती है गाज
किताब प्रकरण में सच्चाई सामने आने के बाद कई राज खुलकर सामने आए हैं। जिससे साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि कार्रवाई की गाज शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी गिर सकती है। हालांकि अधिकारी खुद को बचाने के लिए ताकत से जुटे हैं।