गजरौला। धनौरा व हसनपुर रेंज के 58 गांव राज्य वन्य जीव अभयारण्य में शामिल किए गए हैं। अब तक ये गांव हस्तिनापुर वन्य जीव विहार में शामिल थे। इन गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। बारहसिंगा की प्रिय घास उगाई जाएगी। उसके संरक्षण के लिए फटेरा घास के काटे जाने पर प्रतिबंध के साथ ही खनन पर भी प्रतिबंध रहेगा।
पूर्व में अमरोहा जिले की मंडी धनौरा व हसनपुर तहसील क्षेत्र के 125 गांव हस्तिनापुर वन्य जीव विहार में शामिल थे। जिनमें बीते साल 67 गांव हस्तिनापुर वन्य जीव विहार से बाहर किए गए। दोनों रेंज के 58 गांव ही रह गए थे। वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों ने इन गांवों के जंगल का भ्रमण किया तो बारहसिंगा की चहल कदमी पाई गई। जिसके चलते हस्तिनापुर वन्य जीव विहार के गांवों को राज्य वन्य जीव अभयारण्य में शामिल कर दिया गया। उसका नाम भी राज्य वन्य जीव बारहसिंगा अभयारण्य कर दिया गया है। इस क्षेत्र में वन्य जीवों के शिकार करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
वन विभाग के एसडीओ विमल भारद्वाज का कहना है कि अब उपरोक्त गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। कोई भी ग्रामीण अपने खेतों में भी खनन नहीं कर सकेगा। हां उसे अपने घर या घेर में भराव डालना है तो कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। उसके संरक्षण के लिए फटेरा घास के काटने पर प्रतिबंध लगेगा। क्योंकि यह घास उसके छिपने में बड़ी मददगार होती है। जो घास उसको बेहद प्रिय होती हैं, उनको रोपा जाएगा।
करीब एक दर्जन बारहसिंगा मिले
एडीओ ने बताया कि पिछले दिनों इन गांवाें में बारह सिंगा की चहलकदमी देखी गई थी। जिसके बाद वन विभाग की ओर गणना की गई। गणना में बारह सिंगा की संख्या दर्जन पाई गई। जिसके बाद इन गांवों को राज्य वन्य जीव बारहसिंगा अभयारण्य शामिल करने की योजना बनी। अब इस पर मुहर लग गई है। बताया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की टीम द्वारा यहां आकर बारह सिंगा के फोटो भी लिए गए हैं। बारह सिंगा की सुरक्षा को लेकर पूरे इंतजाम किए जा रहे हैं।
ये होंगे फायदे
-जैविक खेती को बढ़ावा देने से पर्यावरण में सुधार आएगा
- शस्त्र लाइसेंस पर प्रतिबंध रहने से अपराध पर लगाम लगेगी
-मिट्टी के खनन पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया जाएगा
-ढांग गिर कर किसी के दबने की आशंका नहीं रहेगी
-लकड़ी तस्करों पर अंकुश लगेगा
-पेड़ों के कटान पर रोक लगने से हरियाली आएगी
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बाढ़ के सीजन में बनेगा बचाव का ठिकाना
धनौरा व हसनपुर रेंज के गांव हर साल गंगा में आने वाली बाढ़ से तबाह हो जाते हैं। बीते साल तीन महीने बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया। बाढ़ में फसलों के नुकसान के साथ ही वन्य जीव भी काल के गाल में समा गए। राज्य वन्य जीव बारहसिंगा अभयारण्य में शामिल हो जाने के कारण उनको बाढ़ से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे। वन विभाग को हर साल ठिकाना बनाना पड़ेगा।