अमरोहा। आज क्रिकेट ही नहीं, बल्कि एथलेटिक्स के क्षेत्र में अमरोहा के युवा सफलता का झंडे गाड़ रहे हैं। सीमित संसाधनों के बीच यहां के एथलीटों ने राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपने देश का नाम रोशन किया है। गांव की पगडंडियों से दौड़ शुरू करने के बाद यहां के खिलाड़ियों ने विदेश में फर्राटा भरते हुए कई मेडल अपने नाम करते हुए अपने काबिलियत का लोहा मनवाया है। क्रिकेट की चकाचौंध के बीच अमरोहा के खिलाड़ी एथलेटिक्स के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। पढ़ाई के साथ-साथ गांव की गलियों में दौड़ते और खेलते हुए यहां के युवाओं ने सीमित संसाधनों के बीच अपनी प्रतिभा को निखारते हुए मेडल झटके हैं।
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दीक्षा ने तय किया एशियन गेम्स तक का सफर
पिछले साल चीन में आयोजित हुई एशियन गेम्स में गजरौला के शादपुर की दीक्षा ने भाग लिया था। हालांकि, वह पदक से चूक गईं, लेकिन अपनी प्रतिभा से उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। अपने गांव से रोजाना 24 किलोमीटर की दूरी तय तक पसीना बहाते हुए तैयारी करने के लिए पहुंचती थीं। 800 एवं 1500 मीटर दौड़ की ओपन नेशनल चैंपियनशिप में तीन गोल्ड एवं एक सिल्वर मेडल जीतने वाली दीक्षा ने पिछले साल चीन में आयोजित हुए एशियन गेम्स में फाइनल तक का सफर तय किया। कोच रणदीप सिंह के अनुसार बचपन में गांव की पगडंडियों दाैड़ते-दौड़ते अपनी प्रतिभा को पहचान कर दीक्षा ने कोचिंग शुरू की। फिलहाल वह उड़ीसा में ओलंपिक की तैयारी कर रही हैं।
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हर्षित ने हैमर थ्रो में दुबई में झटका गोल्ड
बचपन से खेलों की और रुझान रखने वाले सरकड़ा कमाल निवासी हर्षित चौधरी ने विदेश में भी अमरोहा डंका बजाया है। हाल ही में दुबई में आयोजित हुई जूनियर एशियन चैंपियनशिप में हर्षित ने गोल्ड झटक कर अमरोहा ही नहीं, बल्कि अपने देश का नाम रोशन करते हुए वहां तिरंगा लहराया। अपने भाइयों को देखकर हर्षित का खेल में रुझान हुआ। जिसके बाद कोच निर्भय सिंह से हैमर थ्रो के गुर सीखकर अपने खेल को जुनून को आगे बढ़ा रहे हैं। इससे पहले हर्षित नेशनल चैंपियनशिप में एक गोल्ड एवं दो सिल्वर मेडल प्राप्त कर चुके हैं।
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डिस्कस थ्रो में नाम कमा रहे पुलकित
जोया के घंसूरपुर निवासी पुलकित डिस्कस थ्रो में जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय की प्रतियोगिता में 50.60 मीटर के रिकॉर्डधारी पुलकित चौधरी ने हाल ही में अप्रैल माह में आयोजित हुई यूपी सीनियर स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड पर कब्जा जमाया था। सीमित संसाधनों के बीच खेल शुरू करने वाले पुलकित को परिजनों का भी सहयोग मिला। बाद में कोच रणदीप सिंह की शार्गिदगी में उन्होंने डिस्कस थ्रो की बारीकियों को सीखा।
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रेनू ने इंटर स्टेट में झटका था गोल्ड
हफीजपुरा निवासी रेनू सिंह ने गांव से निकलकर इंटर स्टेट यूनिवर्सिटी की पांच हजार एवं दस हजार मीटर दौड़ में पदक झटक कर जिले का नाम रोशन किया था। शुरुआती दौर में गांव से निकलकर धनौरा एवं बाद में मुरादाबाद स्थित स्टेडियम में वह तैयारियां किया करती थीं। गत वर्ष दिसंबर माह में भुवनेश्वर में आयोजित हुए ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में 5000 मीटर में गोल्ड एवं दस हजार मीटर दौड़ में उन्होंने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया था।
कोरोना काल में किया दौड़ना शुरू, अब झटक रहीं मेडल
मंडी धनौरा के मुकारमपुर निवासी अंशु ने कोरोना काल में दौड़ने की ललक मेडल तक पहुंचा रही है। लायंस कन्या इंटर कॉलेज की छात्रा अंशु ने कोरोना समय में चल रहे लॉक डाउन में दौड़ने की शुरुआत की थी। उस समय अंशु कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कक्षा आठ की छात्रा थीं। अंशु ने चंद्रपुर महाराष्ट्र में आयोजित हुई इंटर स्कूल चैंपियनशिप की 1500 मीटर दौड़ में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था। इससे पहले स्कूली प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अंशु ने अपनी सफलता का मुकाम पाया था।
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जिले में खेलों काे बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। स्टेडियम में एथलेटिक्स के काेच भी युवाओं को अलग-अलग खेलों के गुर सिखा रहे हैं।
- देशकांत त्यागी, जिला क्रीड़ा अधिकारी