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अजाखानों में हुआ जंजीर का मातम, गमे हुसैन में लहूलुहान हुए अजादार

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अमरोहा। वक्ते अस्र कर्बला से आ रही ये सदा, ऐ हुसैन मरहबा, ऐ हुसैन मरहबा। शहर में आठ मोहर्रम का मातमी जुलूस अजाखाना चांद सूरज से बरामद किया गया। गमे हुसैन में डूबे अजादारों ने कई अजाखानों में जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। फिजा में देर रात या हुसैन की सदाएं गूंजतीं रहीं। जिससे माहौल गमगीन रहा।
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मोहल्ला काजीजादा स्थित अजाखाना चांद-सूरज से हुसैनी काफिले की शुरूआत सुबह करीब साढ़े आठ बजे हुई। मरसिया जब चले यसरिब से सिब्ते मुस्तफा सूए ईराक पढ़ा गया। जुलूस अन्य दिनों के जुलूसों से जुदा था। सबसे आगे ऊंटों का काफिला था। जनाबे जैनब, उम्मे कुलसूम और उनके परिवार के लोगों कि छह ऊंटों पर शबिहे आमारी सजी हुई थी। ये छेह अमारियां रिवायेति है। इसके बाद रौशन चौकियां और अराईश थी। सात मोहर्रम को इमाम हुसैन के काफिले पर कर्बला में पानी बंद कर दिया गया था।
बच्चे भूखे और प्यासे थे, लेकिन उन्होंने यजीद की बेअत कुबूल नहीं की और अपनी शहादत देकर इस्लाम को जिंदा कर दिया। इसी मंजर को याद कर जुलूस में शामिल अजादार या हुसैन की सदाएं बुलंद करते हुए चल रहे थे। जुलूस में अलमों की तादाद काफी थी। इस हुसैनी काफिले के अजाखाना दानिशमंदान पहुंचने पर अजादारों ने जंजीर का मातम कर खुद को लहूलुहान कर लिया। मुस्लिम कमेटी की ओर से आली जान मंजिल में चाय पिलाई गई। पूर्व नगर पालिका चेयरमैन अतुल कुमार जैन भी गमे हुसैन में शरीक हुए।
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जुलूस में अंजुमने तहफ्फुजे अजादारी के कार्यवाहक अध्यक्ष हसन शुजा नकवी ने पुलिस प्रशासन का बेहतर व्यवस्था के लिए धन्यवाद अदा किया। अजादारी में सभी धर्मों के लोग शामिल रहे। इस दौरान लियाकत अमरोहवी, जिया एजाज, डॉ. सईदुल हसन, शरफ अली खां, जर्रार हैदर, कमाल हैदर, कमर सिब्तैन, मौलाना रजा अली रजन, डॉ. नाशिर नकवी, हकीम सुहैल, अली आब्दी, मौलाना अहसन अख्तर सरोश, मौलाना मुज्तबा वसीम, मौलाना अफरोज मुज्तबा, हकीम सैयद हुसैन, एहतराम हुसैन आदि मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया। रजाकारान काईद गुलाम सज्जाद, खुर्शीद हैदर जैदी, अख्तर अब्बास अप्पू, मोहम्मद हैदर, सिराज गालिब हुसैनी, नजीर हैदर आदि रहे।
अजादारों ने छुरियों से किया मातम
संवाद न्यूज एजेंसी
नौगांवा सादात। आठ मुहर्रम का जुलूस अंजुमने आब्दिया के तत्वावधान में पीर तबारक हुसैन के मकान मोहल्ला कटकुई से बरामद हुआ। छुरियों का मातम कर अजादारों ने खुद को लहूलुहान कर लिया।
आठ मोहर्रम का मातमी जुलूस एक बजे दिन में बरामद किया गया। जुलूस की शुरुआत में मौलाना आबिद हुसैन ने शहादत हजरत अब्बास अलमदार बयान किया। इसके बाद परचम इस्लाम, शबीह जुल्जनाह, हजरत इमाम हुसैन, हजरत अब्बास, ताबूत अली अकबर, अली असगर, कासिम, ऑन मोहम्मद, ताबूते बरादराने अब्बास और दिगर ताबूत बरामद किए गए। इसके बाद यह जुलूस हुसैनी चौक, थाना नौगावां सादात से होता हुआ रास्ते में एक बीड़ी कंपनी पहुंचा। जहां मौलामा आयम अब्बास ने जनाबे औनो की शहादत के बारे में बताया।
हजारों अजादारों ने ब्लेड और छुरियों से मातम किया। यह मातम ‘नजरे शाह दीं नूरे नजर करती है जैनब, दो लाल बरादर परे फिदा करती है जैनब पर हुआ’। जुलूस इमाम बारगाह शाहफरीद पर पहुंचा। यहां पर जनाबे अब्बास की रवानगी का सफर और खेमों में वापस आलम आना और बच्चों की अल अतश-अल अतश की मंजरकशी पेश की गई। इसको मौलाना मसरूर अब्बास इमामे जुमा शिया जामा मस्जिद ने और मौलाना आबिद ने बयान किया। इस जुलूस में नोहा अली अब्बास, मंजर अब्बास, आशु, शबाब हैदर, अली आबिद, जहीर अब्बास, अली नवाज, नौहा पढ़ते हुए चल रहे थे। यह जुलूस इमाम बारगाह कटकूई पर वापस हुआ। जुलूस का संचालन हुसैन अब्बास हुंमायु, मास्टर अली हैदर, मास्टर करामत अली आदि कर रहे थे। जुलूस में अजमन के सदर शाह रजा शाही, सेकेट्री अब्बास जिया, मेहर अब्बास, राजा, इकराम हैदर, नूर अब्बास राणा, गौहर नौगांवी, बाबर, मजहर अब्बास, मुशर्रफ अली, शिबाल हैदर, नदीम अब्बास, अली अब्बास, मुबारक अली, अली नवाज, नजर अब्बास, नदीम अब्बास आदि रहे।
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