अमरोहा। कर्बला की याद में चार मोहर्रम का मातमी जुलूस नगर के मोहल्ला मछरट्टा स्थित अजाखाना हुरमत शाह से बरामद हुआ। फिजा में देर शाम तक या हुसैन या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं।
जुलूस अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के तत्वाधान में चार मोहर्रम को मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में सबसे आगे ऊंट चल रहे थे। जिन पर सवार मासूम बच्चों ने काले कपड़े पहने हुए थे। जो, लब्बैक या हुसैन की सदा बुलंद कर रहे थे। इसके पीछे आराईश चल रही थी। रौशन चौकी में मातमी धुन बजाई जा रही थी। इसके पीछे हुसैनी बाजा, अलम, तख्त व दुलदुल थे। जो, करबला की जंग के तमाम मंजरों की याद दिला रहे थे। आशिकाने हुसैन नंगे पैर शहीदे कर्बला का नारा लगाते हुऐ चल रहे थे। जुलूस की शुरूआत में तबारक अली व उनके हमनवा ने मर्सिया पढ़ा। जुलूस में दुलदुल जिस पर पड़ी चादर को अजादार चूमते चल रहे थे।
पुरानी रिवायत के मुताबिक जुलूस दरबारे कलां, कटकुई, लकड़ा, हक्कानी, पचदरा, काजीजादा, मजापोता, कोट, दानिशमंदान, बगला, शफात पोता होते हुआ कटरा, गुजरी से होकर दोबारा मच्छरट्टा पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के कार्यवाहक अध्यक्ष हसन शुजा नकवी, लियाकत अमरोहवी, जिया एजाज, डॉ सईदुल हसन, शरफ अली खां, जर्रार हैदर, कमाल हैदर, कमर सिब्तैन, डॉ. नाशिर नकवी, काजिम अब्बास, फरमान हैदर, हकीम सैयद हुसैन, सईद रजा आदि लोग मौजूद रहे। जुलूस का संचालन अंजुमन रजाकाराने हुसैनी ने किया। रजाकारान काईद गुलाम सज्जाद, खुर्शीद हैदर जैदी, अख्तर अब्बास अप्पू, डॉ. चन्दन नकवी, वसीम जैदी, इमदाद आब्दी, मोहम्मद हैदर, सिराज गालिब हुसैनी, नजीर हैदर आदि जुलूस में शामिल रहे।
उधर, शहर के अजाखानों में मजलिसों का भी सिलसिला जारी रहा। अंजुमन तहफ्फुजे अजादारी के कार्यवाहक अध्यक्ष हसन शुजा नकवी ने बताया कि आज यानि गुरुवार को पांच मुहर्रम का जुलूस मोहल्ला सद्दो स्थित अजाखाना रफाती से बरामद होगा। यह जुलूस अपने रिवायती रास्तों से गश्त करता हुआ वापस आएगा। यह अजाखाना इश्के हुसैन में रफाती नामक सक्के ने बनवाया था। तभी से इस अजाखाने से अजादारी का सिलसिला हस्बे दस्तूर चलता आ रहा है।