जोया (अमरोहा) के पतेई खालसा गांव में मोहर्रम के जुलूस में शामिल 35 फीट ऊंचा ताजिया हाईटेंशन लाइन से टकरा गया। इससे ताजिया ले जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉली (ट्रिपलर) में करंट फैल गया, जिसकी चपेट में आकर छठी कक्षा में पढ़ने वाले उवैस (13) और कारपेंटर शाने मोहम्मद (35) की मौत हो गई। 55 से अधिक लोग झुलस गए। तार से टकराते ही तेज धमाके के साथ ताजिये ने आग पकड़ ली। इससे कुछ अन्य ताजिये भी जलकर राख हो गए।
पतेई खालसा में शनिवार शाम निकाले गए दसवीं मोहर्रम के पारंपरिक जुलूस में आठ सौ से ज्यादा लोग शामिल थे। छोटे-छोटे तीन ताजिये अजादारों के कंधों पर थे, जबकि सबसे बड़े और ऊंचे ताजिये के लिए ट्रैक्टर की व्यवस्था की गई थी। पतेई खालसा से शुरू हुआ जुलूस ढकिया चमन और नीलीखेड़ी होते हुए कर्बला तक जाना था। रास्ते में हाईटेंशन लाइन के नीचे से गुजरते समय हादसा हो गया।
हादसा होते ही जुलूस में शामिल लोगों के बीच चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। साथ चल रही डिडौली थाने की पुलिस की सूचना पर डीएम राजेश कुमार त्यागी, एसपी आदित्य लांग्हे समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे। करंट की चपेट में आए ताजियेदारों और अजादारों को एंबुलेंस व पुलिस की गाड़ियों से मुरादाबाद स्थित टीएमयू के मेडिकल कॉलेज लाया गया। वहां डॉक्टरों ने पतेई खालसा निवासी उवैस और शाने मोहम्मद को मृत घोषित कर दिया। हादसे में झुलसे और घायल हुए लोगों को वहां भर्ती करके उपचार दिया जा रहा है। उधर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने समझाकर लोगों को हटाया। अफसरों की सलाह पर अन्य ताजियेदारों ने शेष ताजियों को नीलीखेड़ी ले जाकर कर्बला में दफनाया।
ताजियों के लिए तय थी 12 फीट ऊंचाई
मोहर्रम की तैयारी के क्रम में प्रशासन ने अमरोहा जिले में किसी भी ताजिये की अधिकतम ऊंचाई 12 फीट रखने के निर्देश दिए थे। हादसे का कारण बना ताजिया 35 फीट ऊंचा था। उसके टॉप पर पांच फीट ऊंची सरिया में झंडी लगी हुई थी। सीओ सिटी विजय कुमार राणा ने तीन दिन पहले डिडौली कोतवाली में ताजियेदारों के साथ बैठक में भी यह बात स्पष्ट की थी।
पतेई खालसा में ताजिये की ऊंचाई तय नियमों से अधिक थी। ताजिया उच्च क्षमता की विद्युत लाइन की जद में आ गया। हादसा दुखद है। सभी घायलों को भर्ती कराके उचित इलाज दिलाना पहली प्राथमिकता है। हादसे की जांच भी कराई जाएगी। इसके लिए टीम गठित की जा रही है।
- राजेश कुमार त्यागी, डीएम अमरोहा