जनपद बनने के बाद अमरोहा नाम की वापसी कराई थी मुलायम सिंह यादव ने
अमरोहा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव का अमरोहा से गहरा जुड़ाव रहा है। धरतीपुत्र कहे जाने वाले मुलायम सिंह पार्टी पदाधिकारी ही नहीं जनता भी मुरीद थी। ये ही वजह है कि वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में आखिरी बार अमरोहावासियों के बीच आए मुलायम सिंह ने चारों सीटें जीती थीं। इतना ही नहीं बसपा शासनकाल में ज्योतिबाफुले नगर बने जनपद को सपा सरकार बनते ही उन्होंने अमरोहा का नाम दिया था। अमरोहा के कई दिग्गजों से उनके राजनीतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरा जिला गमगीन है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 24 अप्रैल 1997 को संत महात्मा ज्योतिबाफुले की याद में ज्योतिबाफुले नगर के नाम से जिले का गठन किया था। लेकिन वर्ष 2002 में सपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने जेपीनगर समेत प्रदेश के नवगठित अन्य जिलों की समाप्ति की घोषणा कर दी थी। जिसके बाद जिले के तमाम लोग जनपद का नाम बदलकर अमरोहा रखने के समर्थन में उतर आए थे। इस संबंध में कुछ लोग मुलायम सिंह यादव से मिले। लगातार नाम बदलने की मांग उठाई जा रही थी। मुलायम सिंह यादव वर्ष 2012 में विधानसभा चुनाव के दौरान जनसभा को संबोधित करने आखिरी बार अमरोहा आए थे। इस दौरान उन्होंने सदर विधायक महबूब अली के समर्थन में जीआईसी के मैदान में जनसभा को संबोधित किया था। उस दौर में अमरोहावासी मुलायम सिंह यादव के मुरीद थे। इस दौरान मुलायम सिंह यादव के आह्वान पर जनपदवासियों ने जिले की चारों सीटें उन्हें दे दीं थीं। वर्ष 2012 में दोबारा सरकार बनने पर मुलायम सिंह के कहने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जेपीनगर जिले का नाम अमरोहा कर दिया था। इससे पहले मुलायम सिंह यादव 1994 में जोया बाजार के मैदान आए थे। महबूब अली उस समय कांठ सीट से विधायक थे उनके बुलावे पर उन्होंने सम्मेलन को संबोधित किया था। इसके बाद महबूब अली के बुलावे पर 1997 में शकरपुर गांव में आए थे।