अमरोहा । उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले जनपद न्यायालय के अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित तीनों आपराधिक कानूनों को लागू करने से पूर्व व्यापक सार्वजनिक चर्चा किए जाने को लेकर आवाज उठाई ।
बुधवार को अधिवक्ता राजीव गोले के चेंबर में हुई विचार गोष्ठी में पूर्व अध्यक्ष महाराज सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा अंग्रेजों के बनाए गए तीनों आपराधिक सीआरपीसी, आईपीसी एवं साक्ष्य अधिनियम कानूनों को समाप्त कर नए सिरे से नए आपराधिक कानून लागू करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यह सरकार का प्रगतिशील एवं स्वागत योग्य कदम है। लेकिन इन प्रस्तावित तीनों कानूनों के प्रावधानों एवं विधिक जटिलताओं के संबंध में सूक्ष्म और दूरदर्शी विचार करने के लिए सार्वजनिक चर्चा भी की जानी चाहिए। हालांकि अभी हमने तीनों प्रस्तावित कानूनों को बारीकी से नहीं पढ़ा है। जिस कारण उन पर कोई भी टिप्पणी की जानी उचित नहीं है। ई एफआईआर एवं हिट एंड रन से संबंधित मामलों के प्रावधानों पर भी पुनर्विचार करना चाहिए। सरकार को जल्दबाजी में इन्हें लागू करने से बचने की आवश्यकता है। यह सरकार की श्रेष्ठ और प्रगतिशील सोच का नतीजा है कि इन कानूनों को नए सिरे से लागू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनु शर्मा एडवोकेट ने कहा कि अभी इन कानूनों के संबंध में जल्दबाजी में कुछ भी कहना उचित नहीं है लेकिन हिट एंड रन से संबंधित जो प्रावधान सरकार द्वारा ले गए हैं। वह व्यवहारिक नजर नहीं आते हैं। इस दौरान ज्ञान प्रकाश शर्मा, राजीव गोले, खुसरो नदीम, संजीव जिंदल, शैलेंद्र सिंह सोनू, दिनेश सिंह, राजीव सिंह सैनी, देवेंद्र सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।