स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से चार साल बिना ड्यूटी किए वेतन लेने वाली एसीएमओ डॉ.इंदु को शासन ने निलंबित कर दिया है। लेकिन बड़ी बात ये है कि सेवानिवृत्ति के दो महीने बाद उनका निलंबन हुआ है। स्वास्थ्य अफसरों की कारगुजारी का पर्दाफाश होने के बाद डीएम ने डिप्टी सीएमओ को निलंबित करने व सीएमओ आफिस के जिम्मेदार अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। फिलहाल शासन स्तर से कार्रवाई के बाद सीएमओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
मार्च 2022 में स्वास्थ्य विभाग में चल रहे इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। जिसके बाद डीएम बीके त्रिपाठी ने तत्कालीन सीएमओ डॉ संजय अग्रवाल व एकाउंटेंट समेत महिला डिप्टी सीएमओ डॉ इंदुबाला के अभिलेखों के साथ तलब किया था। डीएम के सख्त रुख को देखकर बिना ड्यूटी के वेतन जारी करने का कबूल कर लिया था। जबकि इंदु बाला का वेतन करीब ढाई लाख रुपये प्रति माह था। इस पर डीएम ने सीएमओ डॉ.संजय अग्रवाल समेत एकाउंट को जमकर फटकार लगाई था। इसके साथ ही महिला डिप्टी सीएमओ को सस्पेंड करने के लिए शासन को पत्र भेजा था। इतना ही नहीं बिना ड्यूटी के फर्जी हाजिरी लगाकर उनका वेतन देने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट भेजी थी। तभी से ये मामला शासन स्तर पर पेंडिंग चल रहा था। अब
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने विभागीय अफसरों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है। डिप्टी सीएम के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ डॉ.इंदु बाला को निलंबित कर दिया गया है। जबकि तत्कालीन सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल पर भी विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। वहीं लगातार वेतन बनाने वाले लिपिक संतोष कुमार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसके अलावा उप मुख्यमंत्री ने इस फर्जीवाड़े में संलिप्त अन्य कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराने का भी आदेश दिया है। डिप्टी सीएम की इस कार्रवाई के बाद सीएमओ कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों में खलबली मची हुई है।
मुरादाबाद के मोहल्ला बुद्धि बिहार निवासी डिप्टी सीएमओ डॉ. इंदु बाला सात जून 2018 से सीएमओ कार्यालय में बतौर उप जिला कुष्ठ अधिकारी तैनात थी। डिप्टी सीएमओ के पति डॉ.अजय वर्मा मथुरा में सीएमओ हैं। आरोप था कि वह वह कार्यालय नहीं आती थी। हैरत की बात ये थी कि एसीएमओ डॉ.इंदु की कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों तक ने सूरत नहीं देखी थी। लेकिन सीएमओ कार्यालय में साठगांठ के चलते हर महीने पूरा वेतन लगभग ढाई लाख रुपये दिया जा रहा था।