जनपद में 15 वर्ष की अवधि पूरा करने वाले 35 हजार निलंबित वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। वाहन मालिकों ने न तो पंजीयन-फिटनेस का नवीनीकरण कराया है। बीमा व वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र भी नहीं हैं। ये वाहन एक तरफ जहां सड़कों पर दुर्घटना की वजह बन रहे हैं तो वहीं वातावरण को दूषित कर रहे हैं।
इतना ही नहीं निलंबित दोपहिया वाहनों के पीछे बॉडी बनाकर जुगाड़ वाहन बनाए जा रहे हैं, जिनका शहर से लेकर गांव तक धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने परिवहन विभाग से जुड़ा मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं परिवहन विभाग इन वाहनों पर कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं।
मोटर वाहन विभाग पंजीकृत निजी प्राइवेट वाहनों की पंजीयन सीरीज यूपी 23, यूपी 23ए, यूपी 23बी और यूपी 23सी के करीब 35 हजार निजी/प्राइवेट वाहन 15 वर्ष से अधिक की समय अवधि पार कर चुके हैं। बावजूद इसके वाहन मालिकों ने इन वाहनों का न तो पंजीयन प्रमाण पत्र बनवाया है और न फिटनेस का नवीनीकरण कराया है। विभाग ने इन वाहनों का पंजीयन भी निरस्त नहीं किया। इन वाहनों दो पहिया, चार पहिया वाहन और कृषि ट्रैक्टर शामिल है जो बिना पंजीयन फिटनेस नवीनीकरण कराए जनपद में सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इस मामले में सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य अनिल कुमार जग्गा ने एसपी को पत्र खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा। मामले की शिकायत आईजीआरएस पर भी की तो पुलिस ने वाहनों पर कार्रवाई से पल्ला झाड़ लिया। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया कि वाहनों पर कार्रवाई आरटीओ परिवर्तन के द्वारा कराई जाए। इसमें थाना स्तर से कार्रवाई की आवश्यकता ही नहीं है। हैरत की बात ये है कि ये वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
वातावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। ऐसे अनफिट वाहनों से लोगों की जान को खतरा बना हुआ है लेकिन जिम्मेदार कार्रवाई करने के मुंह मोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं वाहन मालिकों ने दो पहिया वाहन को पीछे से काटकर जुगाड़ बना लिए हैं जो खुलेआम सड़कों पर माल ढोते देखते हैं। इसके बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती।