ग्रामीणों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र से लेकर खसरा-खतौनी निकालने जैसे कार्यों के लिए तहसीलों का चक्कर न लगाना पड़े इसके लिए हर ग्राम पंचायत में मिनी सचिवालय तैयार किए जा रहे हैं। सचिवालय का कहीं काम अधूरा पड़ा तो कहीं सुविधाओं का अभाव है। जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है।
पंचायत भवनों को आवश्यक सुविधाओं से लैस करने को लेकर शासन गंभीर है। ग्रामीणों को गांव में ही शहरी सुविधाएं मिले इसकी कवायद की गई है। इसके लिए प्रत्येक गांव में पंचायत भवनों को डिजिटल कर यह सुविधा दिए जाने की योजना है लेकिन यह योजना अभी ठंडे बस्ते में पड़ी दिख रही है। अधिकांश मिनी सचिवालय में ताला लटका रहता है।
गांव निवासी रामगोपाल सिंह ने बताया है कि यदि सचिवालय में काम शुरू हो गया होता तो ब्लॉक मुख्यालय का चक्कर नहीं काटना पड़ता। अभी तक जिले में 27 सचिवालय निर्माणाधीन पड़े हैं, जो सचिवालय पूरी तरह से तैयार हो गए हैं उनमें से करीब 125 में अभी कंप्यूटर आदि उपकरणों के अभाव में काम शुरू नहीं हो सका है।
जबकि पंचायत सचिव तैनात किए गए हैं। डीपीआरओ संदीप अग्रवाल ने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों में कुल 357 पंचायत सचिवालयों तैयार किए जाने हैं। इसमें 27 पंचायत सचिवालय निर्माणाधीन है। धनराशि नहीं मिलने के कारण सचिवालयों के निर्माण में दिक्कत आ रही थी। इस कारण तैयार सचिवालयों में फर्नीचर व अन्य उपकरणों की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। अब अधिकांश सचिवालयों में कार्य किए जा रहे हैं। सभी पंचायत सचिवों को ग्रामीणों के कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए शहर के चक्कर न काटने पड़ें।