अमरोहा। एक तरफ जहां किसानों को समय पर गन्ना भुगतान नहीं मिल पा रहा है तो दूसरी ओर कड़ाके सर्दी में उन्हें शुगर मिलों तक अपना गन्ना पहुंचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। शुगर मिलों की अव्यवस्था किसानों पर भारी पड़ रही है। इन दिनों सर्दी ने हाल बेहाल कर रखा है, लेकिन किसान दिन और रात ट्रालियाें पर बैठकर अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं। आलम यह है कि उन्हें 20-20 घंटे तक मिलों के बाहर इंतजार करना पड़ रहा है। जिले में हसनपुर की दि सहकारी चीनी मिल कालाखेड़ा, त्रिवेणी शुगर मिल चंदनपुर और धनौरा में शुगर मिल है। धनौरा और हसनपुर में किसानों को सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्रालियां व बैल गाड़ी खड़ी कर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। रविवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीमों ने धनौरा व हसनपुर की शुगर मिलों की पड़ताल की तो किसान सर्दी में बेहाल नजर आए।
दि सहकारी चीनी मिल कालाखेड़ा
- किसानों को सर्दी के मौसम में गन्ना आपूर्ति करने के बीस घंटे से अधिक का समय चीनी मिल में गुजारना पड़ता है। जिससे रात में ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। -सुकर्मपाल सिंह, किसान राजपुर
- शनिवार की शाम से चीनी मिल में गन्ना लेकर पहुंचे हुए हैं। लेकिन रविवार की दोपहर तक भी नंबर नहीं आया। सर्दी के मौसम में खुले में रात गुजारता मुश्किल काम है।
-राजेंद्र सिंह, किसान वसी कला
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- रविवार की सुबह ही ट्रिपलर से गन्ना लेकर चीनी मिल में पहुंचे हैं। लेकिन, भीड़ के चलते सोमवार की शाम तक गन्ना आपूर्ति हो पाएगा। सर्दी में रात गुजारने में बहुत दिक्कत होती है।
-सतपाल सिंह, किसान लुहारी खादर
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- चीनी मिल में गन्ना आपूर्ति करने में कई घंटे लग जाते हैं। दो व्यक्ति ट्रिपलर व ट्रैक्टर पर रहते। एक सोता है तो एक को जागना पड़ता है। व्यवस्था में सुधार होना चाहिए।
-सतीश सिंह, किसान बाईखेड़ा
मिल में गन्ना आपूर्ति करने में किसानों को परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाता है। लेकिन, कई बार भीड़ अधिक होने पर समस्या हो जाती है। किसानों को समय से पर्चियां भी उपलब्ध की जा रही है।
-आकाश तिवारी, मुख्य गन्ना अधिकारी, दि किसान सहकारी चीनी मिल कालाखेड़ा हसनपुर
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धनौरा शुगर मिल वेव इंडस्ट्रीज
मौजूदा समय में गन्ना सीजन पीक पर है। बड़ी संख्या में किसान गन्ना लेकर शुगर मिल पहुंच रहे हैं। रात-रात भर किसानों को अपने नंबर का इंतजार करना पड़ता है। कहने को अलाव की व्यवस्था तो है, लेकिन सर्द रात खुले में बिताना चुनौती से कम नहीं है।
-देवीशरण शर्मा, किसान, ग्राम मलेशिया
शुगर मिल प्रबंधन की ओर से किसानों के लिए ठोस व्यवस्था नहीं की जाती है। कई बार पर्चियां ही देरी से मिलती हैं। एक बार में सैकड़ों किसान गन्ना लेकर पहुंचते हैं तो नंबर आने में घंटों लग जाते हैं। रविवार तड़के में मैं गन्ना लेकर पहुंचा तो दोपहर दो बजे नंबर आया। इस सर्दी में हालत पतली हो जाती है।
-सुखवीर सिंह, किसान, ग्राम बाखरपुर
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बयान : गन्ने से लदे वाहनों को खड़ा करने के लिए 15 हजार क्विंटल क्षमता का यार्ड बना हुआ है। एक यार्ड और बनाया जा रहा है। किसानों के विश्राम के लिए विश्राम घर बने हुए हैं। किसानों को ठंड से बचाने के लिए पूरी रात अलाव की व्यवस्था की जाती है। मिल में तकनीकी फाल्ट होने पर ही गन्ने से लदे वाहन सड़क किनारे खड़े होते हैं।
-जगतवीर सिंह गन्ना महाप्रबंधक वेव इंडस्ट्रीज
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जगह नहीं होने से सड़क पर वाहन खड़े करना मजबूरी
मंडी धनौरा। इन दिनों शुगर मिल में यार्ड ट्रैक्टर-ट्रालियों से भर जाता है। रविवार को भी यार्ड में भीड़ रही। ऐसे में गन्ने के ट्रक व ट्रैक्टर-ट्रालियां सड़क पर खड़ी नजर आईं। ऐसा नहीं कि दिन ही गन्ने के ट्रक व ट्रालियां दिन ही सड़क पर खड़े होते हैं, बल्कि रात में भी वहां खड़ा करना मजबूरी रहता है। रविवार को शुगर मिल के बाहर धनौरा फीना मार्ग पर गन्ना लदे ट्रक व ट्रैक्टर-ट्रालियों की लाइन लगी नजर आई।
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इस बार मिल प्रबंधन को पूर्व में ही निर्देशित किया जा चुका है कि सड़कों पर गन्ने के ट्रक व ट्रैक्टर-ट्रालियों को खड़ा न होने दें। उन्हें यार्ड में ही लिया जाए। वहीं, गन्ना लदे वाहनों पर रिफलेक्टर लगवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि मिलों के बाहर सड़कों पर गन्ना लदे वाहन खड़े हो रहे हैं तो इस संबंध में मिल प्रबंधन और पुलिस को दिशा निर्देश दिए जाएंगे।
- राजेश कुमार त्यागी, डीएम