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बाइक में किक मारते समय पैर में लगी चोट, संक्रमण से छोटे भाई की मौत, सदमे से बड़े भाई ने तोड़ा दम

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भादर : त्रिसुंडी गांव में रोते-बिलखते परिवारीजन व अन्य। -संवाद - फोटो : AMETHI
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भादर (अमेठी)। थाना रामगंज के त्रिसुंडी गांव में दीपावली की रात दो सगे भाइयों की मौत हो गई। एक सप्ताह से बीमार चल रहे छोटे भाई की मौत अस्पताल में हुई तो बड़े भाई की मौत उसका शव देखने के बाद सदमा लगने से हो गई। एक साथ दो मौतों से घर में कोहराम मच गया। मंगलवार को एक साथ दोनों भाइयों की अर्थी उठी तो पूरे गांव की आंखें नम हो गई, गांव ही सुबक पड़ा।
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त्रिसुंडी गांव निवासी संजय कश्यप (40) करीब एक सप्ताह पूर्व बाइक स्टार्ट कर रहा था। इसी दौरान किक उसके पैर में लगी और वह चोटिल हो गया। परिवारीजन रामगंज स्थित एक निजी चिकित्सक के यहां संजय का इलाज करवा रहे थे। सोमवार सुबह उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। पैर में काफी सूजन आ गई। परिजन सुल्तानपुर स्थित एक नर्सिंग होम ले गए, जहां मौजूद चिकित्सकों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया। परिवारीजन संजय को दीनबंधु हॉस्पिटल ले गए और भर्ती करवाया।
जहां चिकित्सकों ने बताया कि इंफेक्शन की वजह से पूरे शरीर में जहर फैल गया है। इलाज के दौरान सोमवार रात करीब एक बजे संजय की मौत हो गई। संजय का शव सुबह चार बजे घर पहुंचा। शव पहुंचते ही घर में कोहराम मच गया। मृतक का बड़ा भाई रंजीत कश्यप उर्फ रंधे (42) छोटे भाई का शव देखकर वहीं अचेत होकर गिर पड़ा। परिजन रामगंज स्थित एक निजी चिकित्सक के यहां उसे ले गए, जहां उसे भी मृत घोषित कर दिया गया। दो भाईयों की एक ही दिन हुई मौत से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है।
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दो भाईयों की एक ही दिन हुई मौत से दीपावली की खुशियां मातम में बदल गईं। घर में कोहराम मच गया। दोनों भाइयों के मौत की खबर लगते ही गांव और आसपास के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर किसी की आंखें नम थीं। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
पांच भाइयों में संजय कश्यप सबसे छोटा है। वह अपने बड़े भाई रंजीत कश्यप के साथ रहता था। थ्री व्हीलर चलाकर परिवार का जीविकोपार्जन करता था। संजय की पत्नी शीला रह-रह कर अचेत हो जा रही है। तीन बच्चों में बड़ी पुत्री शिवानी (18), छोटी पुत्री नेहा (16) व पुत्र अभी (10) के सिर से पिता का साया उठ गया।
रंजीत कश्यप मेकैनिक था। किसी तरह वह परिवार का भरण पोषण करता था। उसकी पत्नी मंजू (38) का तो हाल बेहाल हो गया है। रंधे के भी तीन बच्चों में बड़ी पुत्री कोमल (18), छोटी गुड़िया (12) और पुत्र निहाल (9) के सिर से पिता का साया उठ गया।
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