अमेठी सिटी। देवोत्थानी एकादशी पर्व पर शनिवार को महिलाओं ने श्रद्धा व उत्साह से पूरे दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता तुलसी की पूजा-अर्चना की। रविवार की अलसुबह महिलाएं सूप बजाकर दरिद्रता जाए, लक्ष्मी आए के पारंपरिक गीतों के साथ तुलसी विवाह संपन्न करेंगी।
धार्मिक मान्यता है कि देवोत्थानी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं, जिसके साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी का विवाह कराया जाता है। घरों और मंदिरों में सुबह से पूजा-पाठ, भजन का क्रम चलता रहा। महिलाओं ने तुलसी चौरा को दीपों, फूलों और रंगोली से सजाया तथा सायंकाल भगवान विष्णु की आरती उतारी।
आचार्य हेमंतदास ने बताया कि तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
इसे उत्तर दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। नियमित पूजन और जल अर्पण से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने बताया कि शाम के समय तुलसी को स्पर्श करना वर्जित है। देवोत्थान एकादशी पर मंदिरों और घरों में दिनभर पूजा-पाठ किया गया।
एकादशी के अवसर पर बाजारों में गन्ने की खूब बिक्री हुई। सड़क किनारे गन्ना बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि इस वर्ष बिक्री अपेक्षा से अधिक रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी गन्ना खरीदते दिखे, जिससे बाजारों में पूरे दिन रौनक बनी रही।